दरभंगा , अप्रैल 24 -- बिहार के प्रतिष्ठित महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के प्रबंध विभाग की प्रो. सपना सुगंधा ने शुक्रवार को कहा कि शोधार्थियों को शोध-कार्य करने से पूर्व अधिकाधिक संबंधित साहित्य का पुनरावलोकन करना चाहिए।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग द्वारा "समकालीन समय में व्यावसायिक अनुसंधान" विषयक पांच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के आज आयोजित तीसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुगंधा ने शोधार्थियों को शोध-कार्य करने से पूर्व अधिकाधिक संबंधित साहित्य का पुनरावलोकन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि साहित्य पुनरावलोकन से शोध-समस्या का चयन करना सरल हो जाता है और शोध कार्य को सही दिशा मिल पाती है। उन्होंने शोध से संबंधित नियामक संस्थाओं की नीतियां, नैतिकता एवं अभिशासन से जुड़े मुद्दे पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शोधकार्य के लिए उच्च नैतिक मापदंडों का पालन कर विश्वस्तरीय शोध साहित्य का सृजन संभव है। अत: हमें इस दिशा में सोचने तथा कार्य करने की जरूरत है।
सत्र के आरंभ में विशिष्ट अतिथि एन आई टी, जमशेदपुर के डॉ. मनीष कुमार झा ने बताया कि शोध-कार्य की गुणवत्ता की बेहतरी के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमन का पालन किया जाना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें शोध से संबंधित आचार शास्त्र का पालन करना चाहिए। साथ ही शोध आलेख के प्रकाशन में पत्रिकाओं का चयन करते समय भी सतर्कता बरतनी होगी। प्लेगरिज्म, फेब्रिकेशन एवं फ़लसिफिकेशन से बचना जरूरी है।
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