नयी दिल्ली/ढाका , जुलाई 31 -- बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस साल के अंत तक अपने देश लौटने के संकेतों के बीच केन्द्र सरकार ने एक संसदीय समिति को सूचित किया है कि अगस्त 2024 से देश में सुश्री हसीना को भारतीय क्षेत्र से राजनीतिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कोई मंच या स्थान नहीं दिया गया है।

लोकसभा में 30 जून को प्रस्तुत 'भारत-बंगलादेश संबंधों का भविष्य' शीर्षक वाली नौवीं रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय समिति ने यह भी बताया कि सुश्री हसीना के प्रत्यर्पण के लिए बंगलादेश का अनुरोध फिलहाल विचाराधीन है।

विदेश मंत्रालय ने विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति को बताया, "प्रत्यर्पण अनुरोध का परीक्षण भारत सरकार के सक्षम अधिकारियों द्वारा लागू कानून और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा रहा है।"समिति ने टिप्पणी की कि भारत द्वारा सुश्री हसीना को शरण देने का निर्णय 'गंभीर संकट या अस्तित्व के खतरे का सामना कर रहे व्यक्तियों को शरण देने की सभ्यतागत लोकाचार और मानवीय परंपरा' को दर्शाता है। इसके साथ ही समिति ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने इस सिद्धांत का पूरी तरह पालन किया है कि 'हमारी भूमि से किसी भी अन्य देश के खिलाफ कोई राजनीतिक गतिविधि संचालित न हो।'समिति ने सिफारिश की कि सरकार इस दृष्टिकोण को जारी रखे, जबकि यह भी सुनिश्चित करे कि ऐसी स्थितियों को 'उचित संवेदनशीलता' के साथ संभाला जाए।

यह घटनाक्रम बंगलादेश के कानून मंत्री एम असदुज्जमान के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने गुरुवार को कहा था कि यदि सुश्री हसीना भारत से लौटती हैं तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किए जाने की संभावना है।

समिति ने बंगलादेशी नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया को जल्द से जल्द सामान्य करने का भी सुझाव दिया। समिति ने चिंता व्यक्त की कि वीजा जारी करने की संख्या में कमी से भारत और बंगलादेश के बीच जनसामान्य की धारणा और द्विपक्षीय संबंधों दोनों को नुकसान पहुंच रहा है।

भारत ने अगस्त 2024 में राजनीतिक अशांति और सुरक्षा चिंताओं के कारण लगाए गए दो साल के निलंबन को समाप्त करते हुए 28 जून से बंगलादेशी नागरिकों को पर्यटक वीजा जारी करना फिर से शुरू कर दिया है।

समिति ने वीजा नीति की समीक्षा करने, शिकायतों का निवारण करने और आवश्यक सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए वैध यात्रियों को असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए एक द्विपक्षीय सहयोग तंत्र बनाने की सिफारिश की। इसके अलावा, 1996 के गंगा जल समझौते की समाप्ति की अवधि नजदीक आने के बीच संसदीय समिति ने समझौते के नवीनीकरण का आह्वान किया। यह देखते हुए कि बंगलादेश के साथ औपचारिक चर्चा अभी शुरू होनी बाकी है, समिति ने सिफारिश की कि अद्यतन आंकड़ों और जलवायु परिवर्तन के अनुमानों के आधार पर और पश्चिम बंगाल तथा बिहार सरकारों के परामर्श से 'बिना किसी देरी के' बातचीत शुरू की जाए।

रिपोर्ट में विदेश मंत्रालय से कहा गया है कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दे को ढाका के साथ अपनी बातचीत में प्रमुखता से उठाता रहे।

समिति ने 'बंगलादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के विकास, बंदरगाह विस्तार और रक्षा सहयोग पर चिंता व्यक्त की। समिति ने सरकार से पड़ोसी देश में विदेशी शक्तियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा, क्योंकि 'अमित्र देशों' द्वारा वहां सैन्य ठिकाना स्थापित करने का कोई भी प्रयास भारत के लिए गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा करेगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित