जयपुर , अक्टूबर 24 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि डबल इंजन सरकार जल संकट से मुक्ति, बेहतर कनेक्टिविटी, हवेलियों के जीर्णाेद्धार और पर्यटन को प्रोत्साहित कर शेखावाटी अंचल का समग्र विकास सुनिश्चित कर रही है।

श्री शर्मा शनिवार को जयपुर में आयोजित शेखावाटी विरासत एवं विकास समिट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शेखावाटी की वीरता, समृद्ध लोक संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत राजस्थान की गौरवशाली पहचान है। यहां के पूर्वजों की मेहनत, ईमानदारी और समर्पण ने इस क्षेत्र को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई है। यहां की ऐतिहासिक हवेलियां और धार्मिक स्थल अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के विजन के अनुसार राज्य सरकार इसी विरासत को संरक्षित करने के साथ ही उन्हें पर्यटन से जोड़कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही है। वहीं, जल-बिजली उपलब्धता, बेहतर सड़क सम्पर्क और निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने उद्यमियों से नई पीढ़ी को व्यवसाय एवं उद्योगों से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि राजस्थानियों की मेहनत, हुनर और उद्यमशीलता की पहचान पूरी दुनिया में है। युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित कर उसे उद्यमिता और रोजगार सृजन के अवसर उपलब्ध करवाना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, सामाजिक संगठनों, उद्यमियों, स्थानीय नागरिकों और प्रवासी शेखावाटीवासियों के सामूहिक प्रयासों से क्षेत्र विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।

उन्होंने शेखावाटी फाउंडेशन के पदाधिकारियों, विरासत संरक्षण के लिए कार्य कर रहे लोगों और प्रवासी राजस्थानियों की सराहना करते हुए कहा कि शेखावाटी के उद्यमियों और भामाशाहों का देश की आर्थिक प्रगति में योगदान महत्वपूर्ण है। 'कर्मभूमि से मातृभूमि' अभियान में भी प्रवासी राजस्थानियों, भामाशाहों और सामाजिक संस्थाओं ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सबसे बड़ी आवश्यकता पानी है। इसी को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने राम जलसेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौते जैसे महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। उन्होंने बताया कि राम जलसेतु लिंक परियोजना के अंतर्गत लगभग एक लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित कार्यों में से लगभग 41 हजार करोड़ रुपये के कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। इस परियोजना से सिंचाई जल की उपलब्धता के साथ ही पेयजल और औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति में भी सहायता मिलेगी।

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