कोलकाता , अक्टूबर 24 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को 'बिजोया सम्मिलनी' के अवसर पर करीब 8,000 दुर्गा पूजा कमेटियों की बैठक बुलायी है जिसमें आने वाले वर्षों में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने तथा पूजा पंडालों और वहां आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर चर्चा की जायेगी।

सूत्रों के मुताबिक यह बैठक केवल पारंपरिक 'बिजोया' शुभकामनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि इसमें चोरबागान त्रासदी मुख्य चर्चा का विषय होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "पूजा कमेटियों से आग्रह किया जायेगा कि वे योजना बनाने के चरण से ही पंडाल आने वाले लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और इस घटना की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सुझावों को लागू करें।"मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह भगदड़ मुख्य रूप से 'मानवीय भूल' का परिणाम थी। उन्होंने कहा कि जांच टीम द्वारा दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जायेगा। उन्होंने बताया कि जांच की जिम्मेदारी संभालने वाले अवकाशप्राप्त न्यायाधीश घटना के बाकी पहलुओं की जांच करेंगे और तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। उन्होंने कहा, "प्रशासन ने अदालत के हस्तक्षेप का इंतजार किए बिना निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की पहल की है। एसआईटी में कोलकाता पुलिस या कोलकाता नगर निगम का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं है, जो स्वतंत्र जांच के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"मुख्यमंत्री ने कहा, "पहले लोगों को न्याय पाने के लिए अदालत जाना पड़ता था लेकिन अब हम जांच में मदद के लिए अदालत से कह रहे हैं। यह फर्क बिलकुल साफ है।"इससे पहले शुक्रवार को श्री अधिकारी ने दक्षिण 24 परगना के बखराहाट में इस त्रासदी की शिकार 20 वर्षीय स्नेहा भंडारी के परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया कि यह 15वां ऐसा परिवार है जिससे वे मिलने गये हैं और वे दो और परिवारों से मिलने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि इस मुश्किल समय में अगर मैं व्यक्तिगत रूप से इन परिवारों के साथ खड़ा रहूं, तो इससे उन्हें हिम्मत मिलेगी। इसीलिए हमने हर प्रभावित परिवार से अलग-अलग मिलने की योजना बनाई है।" मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता इन परिवारों की भलाई सुनिश्चित करना है, जिसके लिए उन्हें आर्थिक मदद, रोजगार और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए सहयोग दिया जायेगा।

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