नयी दिल्ली , मार्च 28 -- राष्ट्रीय राजधानी में संस्कृत गतिविधियों के केंद्र मंडी हाउस क्षेत्र के एलटीजी ऑडिटोरियम में शनिवार शाम भरतनाट्यम शैली में शिव-पार्वती के प्रेम और भक्ति की भाव विभोर करने वाली प्रस्तुति देखने को मिली।

'आयाम' की ओर से "ओडिसी ऑफ लव " के तहत तनुषा त्यागी की यह एकल नृत्य प्रस्तुति शिव-पार्वती के शाश्वत रूपक के जरिए प्रेम के विविध आयामों-दैवीय, भक्तिपूर्ण और मानवीय- की मोहक छटाओं का जादुई मिश्रण था।

गुरु सिंधु मिश्रा की शिष्या तनुषा ने अपने गुरु द्वारा परिकल्पित और संयोजित इस प्रस्तुति में पारंपरिक मार्गम शैली को अपनाया।इसकी शुरुआत गणेश और शिव वंदना से हुई। राग नट्टई में प्रस्तुत इस वंदना ने मंच पर मंगलमय वातावरण रचा।

इसके बाद राग रेवती में भो शंभो की प्रस्तुति में नृत्यांगना ने स्थिरता और प्रवाह के बीच संतुलन बनाते हुए शिव को केवल नटराज ही नहीं, बल्कि करुणामय और सर्वव्यापी सत्ता के रूप में साकार किया।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पद वर्णम रहा, जिसकी प्रेरणा रामचरितमानस से ली गई थी। इसमें पार्वती की अटूट भक्ति और तपस्या को दर्शाया गया। नृत्य (नृत्त) और भाव (अभिनय) के बीच संतुलन साधते हुए तनुषा ने भावाभिव्यक्ति में ईमानदारी दिखाई, हालांकि कुछ स्थानों पर प्रवाह थोड़ा असमान लगा। सप्तऋषियों द्वारा पार्वती की परीक्षा और उनके अडिग संकल्प को कलाकार ने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।इसके बाद प्रस्तुत पदम अपेक्षाकृत अलग और रोचक रहा, जिसमें शिव-बारात के दृश्य को एक मां की दृष्टि से दिखाया गया।

रामचरितमानस से लिया गया यह प्रसंग भय और विश्वास के द्वंद्व को सामने ला रहा था। हिमालय की पत्नी और पार्वती की मां मैना के आश्चर्य और अस्वीकार के भावों के बीच पार्वती के शांत संकल्प को तनुषा ने सूक्ष्मता से उभारा।अंत में राग देश में प्रस्तुत तिल्लाना ने कार्यक्रम को ऊर्जावान समापन दिया।

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