मुंबई , मई 07 -- महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) ने कहा है कि मुंबई के बाजारों में मछली बेचने वालों को अपनी दुकानों पर मछली काटने और बेचने से रोकना निंदनीय है।

पार्टी ने इसे कोली समुदाय की आजीविका पर हमला बताते हुए प्रशासन पर पारंपरिक मछली विक्रेताओं को बेवजह निशाना बनाने का आरोप लगाया।

रिपोर्टों में बताया गया है कि कुछ बाजारों में नगर निगम के अधिकारियों ने विक्रेताओं, विशेष रूप से कोली महिलाओं को निर्देश दिया है कि वे केवल पूरी मछली ही बेचें। उन्हें यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि कोई बाजार की दुकान पर मछली काटते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने इस प्रतिबंध को सही ठहराते हुए कहा है कि मछली के कचरे से अस्वच्छ हालात, बदबू और स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा होते हैं इसलिए सार्वजनिक बाजारों में साफ-सफाई बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है।

इस फैसले से कोली समुदाय में काफी नाराजगी फैल गई है। कई लोगों का मानना है कि यह उनके पारंपरिक पेशे पर सीधा हमला है।

शिवसेना (यूबीटी) के नेता अखिल चित्रे ने सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-शिंदे गठबंधन सरकार पर मुंबई के मछली पकड़ने वाले समुदाय की आजीविका में दखल देने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर दिया कि अधिकारियों को कोली मछली विक्रेताओं की सदियों पुरानी परंपराओं में बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं है और वे उसी तरह काम करते रहेंगे, जैसा हमेशा से करते आए हैं।

श्री चित्रे ने कहा कि यदि बाजारों में मछली को साफ और काटा नहीं जा सकता, तो फिर ग्राहकों से यह भी कहा जाना चाहिए कि वे पोल्ट्री खरीदते समय जिंंदा मुर्गे और मटन खरीदते समय जिंंदा बकरियां अपने घर ले जाएं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़ी चिंताओं को चुनिंदा तरीके से केवल मछली बाजारों पर ही लागू किया जा रहा है।

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