सीहोर (मध्यप्रदेश) , फरवरी 07 -- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश में दलहन की उपज को बढ़ाने में किसानों की मदद के लिए शनिवार को यहां एक खास 'दलहन मिशन पोर्टल' का शुभारंभ किया। यह पोर्टल देश को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और कृषि सेवाओं को डिजिटल रूप से पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।

इस अवसर पर श्री चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराते हुए कहा कि हमारा संकल्प मसूर, चना, उड़द और मूंग जैसी फसलों की उत्पादकता को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन मिले, जिसके लिए लगातार उन्नत बीजों का विकास किया जा रहा है।"यह नया दलहन मिशन पोर्टल किसानों के लिए एक 'वन-स्टॉप' प्लेटफॉर्म की तरह कार्य करेगा। इसके माध्यम से किसानों को दलहन की खेती के बारे में नवीन तकनीकी जानकारी और उन्नत खेती के तरीके उपलब्ध होंगे। साथ ही दलहन पैदावार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे प्राप्त हो सकेगा और कृषि सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा।

श्री चौहान ने यह भी बताया कि यहां के अमलाहा स्थित शुष्क क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र (इकार्डा) में मसूर की ऐसी किस्म विकसित की जा रही है जो अब 110-120 दिनों के बजाय मात्र 70-80 दिनों में तैयार हो जाएंगी। ये किस्में अत्यधिक गर्मी पड़ने से पहले ही पक जाएंगी, जिससे फसल के नुकसान का जोखिम कम होगा। केंद्र में मसूर के लगभग 3000 नए पौधे विकसित किए गए हैं, जो भविष्य में बीज वितरण के लिए आधार बनेंगे।

मुख्यमंत्री ने सभी कृषि मंत्रियों और विशेषज्ञों से इन नई किस्मों का अवलोकन करने का आग्रह किया ताकि इन्हें पूरे देश के किसानों तक पहुँचाया जा सके। सम्मेलन की एक अनूठी बात यह रही कि आमतौर पर दिल्ली में होने वाली कृषि मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठकें इस बार सीहोर के एक गांव में आयोजित की गईं। विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने गांव में बैठकर दलहन मिशन की भविष्य की रणनीति पर मंथन किया।

उन्होंने कहा कि देशभर में अलग-अलग क्लस्टर में 1000 दाल मिलें खोली जाएंगी, मध्यप्रदेश में 55 दाल मिल लगाई जाएँगी। क्लस्टर में कोई दाल मिल लगाना चाहेगा, तो दाल मिल लगाने के लिए भी 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी केंद्र सरकार देगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "किसान भाइयों से मैं निवेदन करना चाहता हूं कि दलहन मिशन के अंतर्गत हम क्लस्टर डेवलप करेंगे। हर किसान को जो क्लस्टर के अंतर्गत आएगा हम बीज का किट भी देंगे साथ ही एक हेक्टेयर के लिए Rs.10,000 की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी ताकि वो आइडियल खेती करे।"श्री चौहान ने एक अन्य ऐलान में कहा, "आज हम एक फैसला कर रहे हैं कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज़ नहीं होगा, अलग-अलग प्रदेशों में जाकर किसान के बीच बीज रिलीज़ करेंगे। "उन्होंने राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत यहा के इकार्ड कैंपस में प्रशासनिक भवन, किसान प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक कृषि प्रयोगशालाओं का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा, " यहां आज कोई साधारण बिल्डिंग का उद्घाटन नहीं है। यहाँ पर अलग-अलग प्रयोग किए जाएंगे। यहां प्लांट जीनोमिक्स की प्रयोगशालाएँ, प्लांट टिश्यू कल्चर की प्रयोगशाला भी है।अक्सर किसान को अच्छे बीज नहीं मिल पाते और वह रखे-रखाए बीज बोता रहता है। इन प्रयोगशालाओं में अब अच्छे और जल्दी बीज तैयार किए जाएंगे। इकार्डा और आईसीएआर मिलकर यह काम करेंगे ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज मिल सकें।

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