शिवमोग्गा , अगस्त 08 -- कर्नाटक के शिवमोगा जिले में 23 बच्चों के गर्भधारण का पता चलने के बाद जिला प्रशासन ने स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों, स्कूलों और कॉलेजों से अक्सर अनुपस्थित रहने वाली लड़कियों और बाल विवाह के प्रति संवेदनशील परिवारों की गहन निगरानी का आदेश दिया है।

जिला कलेक्टर प्रभुलिंग कवलिकट्टी ने यहां महिला एवं बाल विकास विभाग की समन्वय बैठक और जिला बाल संरक्षण इकाई की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को बाल विवाह को रोकने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने और ऐसे विवाहों को प्रोत्साहित करने, सुविधा देने या सहायता करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिये।

जिला बाल संरक्षण इकाई अधिकारी मंजूनाथ ने कहा कि 2026-27 के अप्रैल और जून के बीच 61 पॉस्को मामलों और बाल विवाह से जुड़े 18 मामलों सहित 79 मामले दर्ज किये गये थे। इनमें 12 बाल विवाह रोके गये और बाल गर्भावस्था के 23 मामले सामने आये। इन सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गयी।

कलेक्टर ने अधिकारियों को लगातार स्कूल अनुपस्थिति और स्कूल छोड़ने को संभावित चेतावनी के संकेत के रूप में मानने और जोखिम वाली लड़कियों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को ग्राम सभाओं और अन्य सार्वजनिक बैठकों के माध्यम से बाल विवाह निषेध अधिनियम पर जागरूकता अभियान तेज करने और यह सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया कि तालुक और जिला स्तर पर बाल विवाह रोकथाम कार्य-बल की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाये। इसके साथ ही व्यापक जन जागरूकता का आह्वान करते हुए अधिकारियों को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और आपातकालीन नंबर 112 का व्यापक रूप से प्रचार करने और अपने माता-पिता को सूचित किए बिना बच्चों के घर छोड़ने के मामलों पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया गया।

बैठक में बाल पोषण की गंभीर चिंता पर भी प्रकाश डाला गया। जिले में 1,037 बच्चों को मध्यम कुपोषित और 52 को गंभीर रूप से कुपोषित के रूप में पहचाना गया।

जिला कलेक्टर ने 52 गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र पर तत्काल उपचार एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। आशा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया कि वे हर तीन दिन में उन बच्चों के घरों का दौरा करें जो एनआरसी में रिपोर्ट करने में विफल रहे थे और उनके पोषण और उपचार की निगरानी करें।

बैठक में अधिकारियों को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण का शत प्रतिशत प्रावधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। जिले में 2,563 आंगनवाड़ी केंद्र हैं, जिनमें 2,103 ग्रामीण क्षेत्रों में और 460 शहरी क्षेत्रों में हैं। जबकि 2,068 केंद्रों के पास अपनी इमारतें हैं, 237 में जगहों की कमी है। अधिकारियों को जीर्ण-शीर्ण भवनों का विवरण प्रस्तुत करने के अलावा स्थलों की पहचान करने और निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।

बैठक में दहेज निषेध अधिनियम और घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम के तहत मामलों की भी समीक्षा की गयी और अधिकारियों को लंबित जांच और अदालती कार्यवाही में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 1,867 लक्ष्य के सापेक्ष 1,912 पहली बार गर्भवती महिलाओं को सहायता प्राप्त हुई है, जिसमें 102 प्रतिशत प्रगति हुई है। लड़की होने पर दूसरे बच्चे के लिए 6,000 रुपये की सहायता प्रदान करने वाली योजना के तहत 738 लक्ष्य के मुकाबले 652 लाभार्थियों को कवर किया गया है।

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