बेंगलुरु , अगस्त 26 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच गुरुवार को होने वाली बैठक में मंत्री बी. नागेंद्र के भविष्य पर चर्चा होने की संभावना है। वाल्मीकि निगम में कथित धन अनियमितता के मामले को लेकर भाजपा लगातार श्री नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रही है।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब भाजपा ने श्री नागेंद्र के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। पार्टी ने एक सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक करीब 200 किलोमीटर की 10 दिवसीय पदयात्रा निकालने की घोषणा की है। भाजपा का कहना है कि पदयात्रा के जरिए वह श्री नागेंद्र के इस्तीफे और कांग्रेस सरकार के खिलाफ अभियान को और तेज करेगी।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व श्री नागेंद्र को मंत्रिमंडल में बनाये रखने के राजनीतिक असर का आकलन कर रहा है। भाजपा द्वारा मुद्दे को सड़क पर ले जाने की तैयारी के बीच कांग्रेस नेतृत्व इस बात पर विचार कर रहा है कि श्री नागेंद्र का बचाव जारी रखा जाये या भाजपा के अभियान के जोर पकड़ने से पहले उनसे इस्तीफा ले लिया जाये।
श्री नागेंद्र ने इससे पहले कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित अनियमितताओं से जुड़े विवाद के बीच मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। बाद में उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया।
भाजपा इस मुद्दे को कर्नाटक विधानसभा में लगातार उठाती रही है और अब उसने पदयात्रा के जरिये इसे जनता के बीच ले जाने की तैयारी की है। प्रस्तावित पदयात्रा ऐसे क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, जहां वाल्मीकि समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है। इससे मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील हो गया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व के सामने दो विकल्प हैं। पहला, श्री नागेंद्र को मंत्रिमंडल में बनाये रखते हुए उनका बचाव जारी रखना और दूसरा, भाजपा के आंदोलन के व्यापक रूप लेनेसे पहले उनसे इस्तीफा लेना। यदि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व मानता है कि नागेंद्र की मंत्रिमंडल में मौजूदगी से पार्टी और सरकार को राजनीतिक नुकसान अधिक हो सकता है, तो उन्हें पद छोड़नेके लिए कहा जा सकता है।
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