बेंगलुरु , जुलाई 10 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को बेंगलुरु के प्रस्तावित दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के स्थान को लेकर चल रही अटकलों पर पूरी तरह से विराम लगा दिया। उन्होंने घोषणा की कि यह ग्रीनफील्ड विमानन केंद्र दक्षिणी बेंगलुरु में बनेगा।

इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना में कम से कम विस्थापन और सस्ती भूमि अधिग्रहण को प्राथमिकता दी जायेगी।

बुनियादी ढांचा विकास मंत्री एमबी पाटिल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री शिवकुमार ने इस लंबे समय से प्रतीक्षित हवाई अड्डा परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। इस परियोजना की योजना केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (केआईए) के भीड़भाड़ वाले यातायात को कम करने के लिए बनायी जा रही है, जो वर्तमान में भारत का तीसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है।

बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अधिकारियों को तकनीकी रूप से उपयुक्त स्थान की पहचान करने के बाद केंद्र सरकार को सौंपने के लिए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है।

श्री शिवकुमार ने कहा, "हवाई अड्डे के संबंध में हमने अतीत में हुई प्रगति पर चर्चा की। हमने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोई भी गांव प्रभावित न हो और ग्रामीणों का विस्थापन न किया जाए। उन्हें ऐसे स्थान की पहचान करने का निर्देश दिया गया है, जहां जमीन की कीमत कम हो, वह इलाका तकनीकी रूप से व्यवहार्य हो और साइट बहुत अधिक पहाड़ी न हो।"सरकार ने हालांकि अभी तक सटीक स्थान को अंतिम रूप नहीं दिया है लेकिन श्री शिवकुमार ने पुष्टि की कि यह हवाई अड्डा बेंगलुरु के दक्षिणी हिस्से में स्थित होगा। इसके साथ ही इन अटकलों पर विराम लग गया कि क्या यह परियोजना पश्चिमी कॉरिडोर की ओर स्थानांतरित होगी।

उन्होंने कहा, "हमने अभी तक किसी विशिष्ट स्थान का नाम तय नहीं किया है लेकिन जैसा पहले प्रस्तावित था, यह दक्षिण में ही होगा। हम ऐसा स्थान चाहते हैं, जहां जमीन की कीमतें कम हों, ताकि राज्य के खजाने पर बोझ कम हो सके। हम नहीं चाहते कि इस परियोजना के लिए गांवों को हटाया जाये। यदि कुछ अलग-थलग घर प्रभावित होते हैं, तो उन्हें मुआवजा दिया जा सकता, लेकिन पूरे गांवों को विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए।"यह घोषणा दूसरे हवाई अड्डे के लिए राज्य के कांग्रेस सरकार के पसंदीदा स्थान का अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है। यह एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है, जिसका उद्देश्य यात्रियों और कार्गो यातायात में लगातार हो रही वृद्धि के बीच बेंगलुरु की बढ़ती विमानन जरूरतों को पूरा करना है।

यह प्रस्ताव बड़े पैमाने पर होने वाले भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास को कम कर बुनियादी ढांचे के विस्तार तथा सामाजिक प्रभाव के बीच संतुलन बनाने के सरकारी प्रयास को भी दर्शाता है।

दूसरे हवाई अड्डे की योजना को राज्य के वर्ष 2026-27 के बजट में औपचारिक बढ़ावा मिला, जहां सरकार ने घोषणा की कि भारतीय विमानन प्राधिकरण (एएआई) से तकनीकी सलाह लेने के बाद एक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जायेगी।

भारतीय विमानन प्राधिकरण के अधिकारियों ने राज्य सरकार की चुनी तीन संभावित जगहों का पहले ही निरीक्षण कर लिया है। इनमें से दो जगहें दक्षिणी बेंगलुरु में कनकपुरा रोड पर हारोहोल्ली के पास और एक जगह शहर के पश्चिम में कुनिगल रोड पर नेलमंगला के पास है। अंतिम स्थान का चयन तकनीकी व्यवहार्यता, कनेक्टिविटी, पर्यावरणीय कारकों और भूमि अधिग्रहण की आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद किया जायेगा।

एक बार पसंदीदा स्थान की पहचान हो जाने के बाद, राज्य सरकार वैधानिक स्वीकृतियों के लिए अपना प्रस्ताव केंद्र को भेजेगी। इससे बेंगलुरु की दीर्घकालिक विमानन और आर्थिक विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनायी गयी कर्नाटक की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक का रास्ता साफ हो जायेगा।

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