बेंगलुरु , अगस्त 27 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के राष्ट्रीय राजधानी के दौरे से राज्य में संभावित कैबिनेट फेरबदल और मंत्रियों जमीर अहमद खान तथा बी. नागेंद्र के भविष्य को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

श्री शिवकुमार का यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस सरकार हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद पैदा हुए राजनीतिक उठापटक से अभी पूरी तरह से संभल भी नहीं पाई है। पार्टी के भीतर असंतोष और मंत्रियों की टीम में बदलाव की मांगों के बीच कैबिनेट में छोटे-मोटे फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं।

पार्टी में खास तौर पर जमीर अहमद खान पर सबकी नजरें हैं, जिन्हें कैबिनेट में शामिल किए जाने से पार्टी का एक खेमा खुश नहीं है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के समर्थक भी शामिल हैं। श्री सिद्दारमैया का पार्टी के कुछ कार्यक्रमों और बैठकों से दूर रहने की खबरों ने इस अंदरूनी बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। दिल्ली में होने वाली बातचीत में मतभेदों को दूर करने और पार्टी में एकता बनाए रखने की कोशिशें शामिल होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री के सामने एक और बड़ा मुद्दा बी. नागेंद्र का है, जिन्होंने पहले कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े विवाद के बाद कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। कैबिनेट में उनकी वापसी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कांग्रेस सरकार के खिलाफ नया मुद्दा दे दिया है। विपक्ष ने उन्हें हटाने की मांग को लेकर अपना अभियान तेज कर दिया है और इस मुद्दे को विधानसभा से बाहर भी ले गए हैं, जिसमें पदयात्रा भी शामिल है।

भाजपा द्वारा वाल्मीकि निगम के मुद्दे को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिशों के बीच उम्मीद है कि कांग्रेस आलाकमान कैबिनेट में श्री नागेंद्र को बनाए रखने के राजनीतिक नतीजों पर विचार करेगा। उम्मीद है कि दिल्ली दौरे के दौरान श्री शिवकुमार श्री राहुल गांधी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से भी मिलेंगे। बातचीत के दौरान श्री नागेंद्र के बने रहने का मुद्दा उठ सकता है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अगर किसी मंत्री को हटाया जाता है, तो इससे कैबिनेट में नये बदलावों का रास्ता खुल सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित