चंडीगढ़ , जून 19 -- शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) की कार्यकारिणी की बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर श्री अकाल तख्त साहिब के अधिकार को सार्वजनिक रूप से चुनौती देने का आरोप लगाते हुए उनकी कड़ी आलोचना की गयी।
पार्टी ने कहा है कि मुख्यमंत्री के बयान और गतिविधियां सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही हैं।
श्री सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि मुख्यमंत्री जानबूझकर सिख समुदाय में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। कार्यकारिणी का मत था कि विवादित वीडियो मामले में मुख्यमंत्री ने न केवल गुरु साहिबानों के प्रति गंभीर अपराध किया है, बल्कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के बावजूद उसके अधिकार को चुनौती देकर अपनी गलती को और बढ़ाया है।
बैठक के बाद वरिष्ठ अकाली नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि कार्यकारिणी ने मुख्यमंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने कहा कि बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा विवादित वीडियो को वास्तविक करार दिये जाने के 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री ने निजी तौर पर प्राप्त प्रयोगशाला रिपोर्टें पेश कर मामले को प्रभावित करने का प्रयास किया।
डॉ. चीमा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने पहले यह दावा किया था कि विवादित वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब ने वीडियो की फोरेंसिक जांच तभी करवाई, जब मुख्यमंत्री ने पांच महीने तक स्वयं जांच करवाने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दिये गये निर्देशों का पालन नहीं किया।
बाद में श्री बादल ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सदस्यों के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा की। बैठक में मौजूद सदस्यों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने वीडियो को एआई से तैयार बताकर सिख संगत को गुमराह करने का प्रयास किया था।
कार्यकारिणी की बैठक में संगठनात्मक ढांचे की भी समीक्षा की गयी। पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का अभियान जारी है और अगले 15 दिनों में संगठनात्मक संरचना को पूरी तरह से अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
बैठक में राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गयी। कार्यकारिणी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए अनावश्यक लाठीचार्ज और दमनात्मक उपायों का सहारा ले रही है। साथ ही राज्य में कानून-व्यवस्था के पूर्ण रूप से चरमराने का भी आरोप लगाया गया।
अकाली दल ने कहा कि वह धार्मिक संस्थाओं की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाता रहेगा तथा इस मुद्दे को जनता के बीच भी लेकर जाएगा।
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