शिमला , मार्च 01 -- हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में केवल एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज होना किसी सरकारी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा शनिवार को जारी निर्देशों में कहा गया है कि अनुशासनात्मक प्राधिकारी केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के नियम 19 का सहारा ले सकते हैं, लेकिन बर्खास्तगी की कार्रवाई तभी की जा सकती है जब सक्षम न्यायालय में आरोप सिद्ध हो जाएं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि नियम 19, जिसके तहत कुछ परिस्थितियों में नियमित विभागीय जांच के बिना भी कार्रवाई संभव है, केवल उन्हीं मामलों में लागू होगा जहां कर्मचारी के खिलाफ न्यायालय द्वारा दोष सिद्धि या विधिक आधार स्पष्ट हो।
निर्देशों में कहा गया है कि केवल प्राथमिकी दर्ज होना, जांच लंबित होना या आरोपपत्र दाखिल होना अपने आप में उक्त नियम के तहत बर्खास्तगी का औचित्य नहीं बनता। संबंधित अपराध में नामजद होने पर कर्मचारी को निलंबित किया जा सकता है।
अधिकारियों ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई ठोस तथ्यों और न्यायिक निर्धारण पर आधारित होनी चाहिए, ताकि सेवा नियमों और संवैधानिक सुरक्षा का पालन सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम राज्य की मादक पदार्थों के खिलाफ असहिष्णुता नीति और लोक सेवकों के विधिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में अब तक पुलिस कर्मियों सहित लगभग 74 सरकारी कर्मचारी नशा तस्करी से जुड़े मामलों में नामजद किए जा चुके हैं।
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