, Aug. 12 -- पटना, 12 अगस्त बिहार के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने बिहार लोक भवन में राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ आयोजित बैठक में कहा कि शिक्षा से जुड़ी नीतियों और फैसलों का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुविधा देना होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा की व्यवस्था में बेहतर बदलाव आ रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों से समन्वय के साथ काम करते हुए उच्च शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने का आह्वान किया।
श्री हसनैन ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि व्यवस्था में बड़े बदलाव की नहीं, बल्कि समय-समय पर जरूरी सुधार और बेहतर समन्वय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नीतियाँ बदलती रहती हैं, लेकिन उनका सही अर्थ समझना और सही तरीके से लागू करना जरूरी है।
राज्यपाल ने समर्थ पोर्टल के क्रियान्वयन को उच्च शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए इसका अधिकाधिक उपयोग करने तथा विश्वविद्यालयों के आंकड़ों के सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखने पर जोर दिया, जिससे भविष्य में डेटा के नुकसान या उसे दोबारा जुटाने की समस्या न हो। उन्होंने कहा कि आगे चलकर समर्थ को विश्वविद्यालयों की सभी प्रमुख गतिविधियों के संचालन का मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया जाना चाहिए।
श्री हसनैन ने जेनरेशन-जी के संदर्भ में कहा कि विश्वविद्यालयों को युवाओं की बदलती सोच और आकांक्षाओं को समझना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद के जरिए उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने तथा उनके लिए सकारात्मक माहौल बनाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि वैसे अभ्यर्थी जो विभिन्न विश्वविद्यालयों में पीएचडी में नामांकित हैं एवं संविदा नियुक्ति में सफल हुए हैं, उनके लिए विशेष निर्देश जारी किया जायेगा,जिससे उन्हें पीएचडी बीच में छोड़ना नहीं पड़े एवं वह अपनी संविदा नियुक्ति के साथ-साथ शोध कार्य भी ससमय सम्पन्न कर सकें।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित