भोपाल , अप्रैल 3 -- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा "शिक्षा में उभरते नए आयाम एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति" विषय पर शिक्षा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा प्रणाली, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा पर विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईआईआईटी के निदेशक डॉ. आशुतोष, परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान, महानगर अध्यक्ष डॉ. महेंद्र मेहरा तथा महानगर मंत्री आरती ठाकुर उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्राध्यापक, विद्यार्थी और शिक्षाविद बड़ी संख्या में शामिल हुए।

संवाद के दौरान वक्ताओं ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभाव तथा शिक्षा को अधिक लचीला, रोजगारोन्मुख और भारतीय मूल्यों पर आधारित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. आशुतोष ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ अपनी समृद्ध ज्ञान परंपरा से जोड़ना आवश्यक है। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को बहुआयामी अवसर प्रदान करती है और उन्हें एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं रखती।

आशीष चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की पहचान उसकी समृद्ध ज्ञान परंपरा से है। उन्होंने कहा कि देश की गुरुकुल परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज के कल्याण से जुड़ा रहा है। उन्होंने भारतीय दर्शन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का उल्लेख करते हुए शिक्षा को सर्वांगीण विकास का आधार बताया।

उन्होंने कहा कि इतिहास में भारतीय शिक्षा व्यवस्था अत्यंत समृद्ध रही है, लेकिन आक्रमणों के दौरान कई प्रमुख ज्ञान केंद्र नष्ट हो गए। इसके बावजूद भारतीय ज्ञान परंपरा सतत बनी रही। उन्होंने शिक्षा में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए देश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

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