जयपुर , अगस्त 22 -- अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) ने राजकीय विद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों और बाहरी हस्तक्षेप को गलत बताते हुए राज्य सरकार से बच्चों की शिक्षा एवं उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई एवं जांच करने की मांग की है।
महासंघ ने शनिवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में यह मांग करते हुए शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। इस दौरान महासंघ के प्रदेश संघठन मंत्री उमराव लाल वर्मा ने शुक्रवार को जयपुर जिले में कुछ बाहरी लोगों द्वारा एक राजकीय विद्यालय में निरीक्षण का प्रयास करने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह गंभीर सवाल है कि राजनीतिक विवादों को राजकीय विद्यालयों तक ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। यदि किसी व्यक्ति या संगठन को किसी राजकीय विद्यालय की व्यवस्था, सुविधाओं अथवा शैक्षणिक स्थिति को लेकर कोई आपत्ति है तो उसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्धारित माध्यम खुले हैं। विद्यालय परिसर में बिना निर्धारित प्रक्रिया के प्रवेश कर राजनीतिक विवाद खड़ा करना किसी भी रूप में उचित नहीं है। संभाग उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा कि विद्यालयों में बाहरी एवं राजनीतिक हस्तक्षेप को नियंत्रित करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विद्यालयों को सुरक्षित, अनुशासित और शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
महासंघ ने ग्रामीणों, शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा सभी राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों से अपील की कि विद्यालयों से जुड़े किसी भी विषय को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न न करें। किसी भी विवाद का समाधान कानून और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाये।
महासंघ ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों की गिरमा से कोई समझौता नहीं होगा और शिक्षकों को राजनीति का टूल बनाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जायेगा। महासंघ ने कहा कि अगर बाहरी हस्तक्षेप करने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं होने पर विरोध करने के लिए सड़कों पर भी उतरा जायेगा।
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