नयी दिल्ली , जून 16 -- संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन-केंद्रीय क्षेत्र ब्याज छूट योजना के तहत पात्रता के लिए 4.5 लाख रुपये की आय सीमा को बढ़ा कर 8 लाख रुपये करने की सिफारिश की है।
राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली इस समति ने शिक्षा मंत्रालय के उच्चतर शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों (2025-26) से संबंधित 364वें प्रतिवेदन में अंतर्विष्ट समिति की सिफारिशों/संस्तुतियों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई संबंधी 381वें प्रतिवेदन में यह सिफारिश की है। राज्य सभा के सभापति को मंगलवार को प्रस्तुत इस प्रतिवेदन में वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं को देखते हुए 4.5 लाख रूपये की सीमा को अत्यधिक अपर्याप्त बताया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, '' समिति दोहराती है कि पारिवारिक आय की सीमा को सभी योजनाओं, सभी प्रकार के पाठ्यक्रमों और सभी संस्थानों में संस्थागत गुणवत्ता रैंकिंग की किसी भी शर्त के बिना, समान रूप से बढ़ाकर 8 लाख रुपये किया जाना चाहिए।''समिति ने प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण के तहत शिक्षा ऋण की सीमा को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किए जाने को सही दिशा में उठाया गया एक कदम मानती है। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सीमा 50 लाख रुपये तक किये जाने की समिति की अनुशंसा से काफी कम है।
समिति ने कहा है, '' उच्च शिक्षा की तेजी से बढ़ती लागत और प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के तहत बिना किसी सुरक्षा के ऋण की उपलब्धता को देखते हुए, संशोधित सीमा अपर्याप्त बनी हुई है। इसलिए, समिति अपनी सिफारिश को दोहराती है कि विभाग वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक के साथ सक्रिय समन्वय स्थापित करे ताकि प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण की सीमा को बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया जा सके।"समिति ने यह भी कहा है कि शिक्षा ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी फंड योजना (सीजीएफएसईएल) के बारे में रिपोर्ट में कहा है कि शिक्षा लागत में एक दशक के दौरान हुई काफी बढ़ोतरी के बावजूद, 7.5 लाख रुपये की गारंटी कवर सीमा वर्ष 2015 से अपरिवर्तित बनी हुई है। योजना के नवीनीकरण के समय इस सीमा पर पुनर्विचार करने का एक सामान्य आश्वासन संतोषजनक नहीं है। समिति सरकार से आग्रह करती है कि गारंटी कवर को अविलंब बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया जाए।
समिति ने कहा है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए वित्तीय सहायता संरचना में एक प्रणालीगत कमजोरी है। ब्याज छूट के प्रश्न पर, समिति प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत 8 लाख रुपये तक की पारिवारिक आय वाले छात्रों के लिए 3 प्रतिशत ब्याज छूट के विस्तार को स्वीकार करती है। हालांकि, चूंकि यह लाभ केवल 'गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों' के छात्रों तक ही सीमित है, इसलिए गैर-गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकित छात्रों की एक विशाल संख्या इससे निरंतर वंचित बनी हुई है।
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