मुंबई , अगस्त 04 -- शिक्षाविद एवं त्रिपुरा, बिहार तथा पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल का मंगलवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

पारिवारिक सूत्रों ने उनके निधन की जानकारी दी।

वह 90 वर्ष के थे।उनके परिवार में उनके पुत्र विजय डी पाटिल, डॉ. अजींक्य डी वाई पाटिल और सतेज पाटिल हैं।

प्यार से "दादा" के नाम से जाने जाने वाले डॉ. पाटिल ने अपने जीवन के कई दशक जनसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समाज कल्याण के लिए समर्पित किये। उन्होंने राजनीति, संवैधानिक जिम्मेदारियां और महाराष्ट्र तथा देश के अन्य हिस्सों में व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार के लिए काम किया।

बाइस अक्टूबर 1935 को कोल्हापुर जिले के अंबाप में जन्मे डॉ. पाटिल एक कृषक परिवार से ताल्लुक रखने वाले डॉ पाटिल ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और एमए, एलएलबी तथा पीएचडी की डिग्री हासिल की।

डॉ. पाटिल ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर से की और 1957 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में कोल्हापुर नगर परिषद के लिए चुने गये। इसके बाद उन्होंने 1967 से 1978 तक महाराष्ट्र के पन्हाला से विधायक के रूप में सेवाएं दीं। राजनीतिक जीवन के बाद सार्वजनिक जीवन में उन्हें एक बड़ी भूमिका तब मिली जब उन्हें त्रिपुरा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने 27 नवंबर 2009 को राज्यपाल के रूप में शपथ ली और 21 मार्च 2013 तक इस पद पर रहे। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने पूर्वोत्तर राज्य में विकास, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार पर जोर दिया।

डॉ. पाटिल को बाद में बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया और उन्होंने 22 मार्च 2013 को पदभार संभाला। वह 26 नवंबर 2014 तक पद पर रहे। उन्होंने 3 जुलाई से 17 जुलाई 2014 तक अतिरिक्त प्रभार के साथ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएं दीं।

कई दशकों तक कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे डॉ. पाटिल बाद में दिसंबर 2018 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये।

उन्होंने समाज के एक बड़े वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के दृष्टिकोण के साथ 1983 में डी वाई पाटिल समूह की स्थापना की।

व्यावसायिक शिक्षा के संस्थानों के साथ शुरू हुआ यह प्रयास बाद में चिकित्सा, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, खेल, स्कूलों और अन्य विषयों में फैले एक बड़े नेटवर्क में विकसित हुआ। उनके द्वारा स्थापित शैक्षिक आंदोलन का अगले चार दशकों में काफी विस्तार हुआ। यह समूह आज बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों का संचालन करता है तथा इसने व्यावसायिक और उच्च शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके संस्थानों ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में भी प्रमुख भूमिका निभायी है।

डॉ. पाटिल का योगदान उच्च शिक्षा तक ही सीमित नहीं था। उनकी पहलों में स्कूल, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, खेल सुविधाएं तथा स्वास्थ्य सेवा संस्थान शामिल थे। समूह की शैक्षणिक और स्वास्थ्य गतिविधियों ने विशेष रूप से महाराष्ट्र में व्यावसायिक शिक्षा की उपलब्धता को मजबूत किया है।

डी वाई पाटिल समूह का कहना है कि इसके संस्थापक द्वारा शुरू किया गया शैक्षिक आंदोलन छह लाख से अधिक छात्रों तक पहुँच चुका है और अगली पीढ़ी के नेतृत्व में 182 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों तक बढ़ गया है। समाज सेवा में उनके योगदान को औपचारिक रूप से तब मान्यता मिली जब उन्हें 1991 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

आधिकारिक पद्म पुरस्कार अधिसूचना में डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल का नाम महाराष्ट्र से समाज सेवा के क्षेत्र में सूचीबद्ध है। डॉ. पाटिल स्वास्थ्य सेवा और धर्मार्थ पहलों से भी गहराई से जुड़े हुए थे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित