नैनीताल , सितंबर 11 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग से स्थानांतरण के आधार बने दिव्यांगता प्रमाणपत्रों तथा पहाड़ और मैदानी क्षेत्रों के वर्गीकरण के मानकों की जानकारी मांगी है। अदालत ने कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के अपर निदेशकों समेत शिक्षा विभाग के अधिकारियों को संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने जीवन सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को पर्वतीय क्षेत्रों में और मैदानी क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों को मैदानी क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है तथा पूरी प्रक्रिया नीति के अनुरूप की गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से सवाल उठाया गया कि किसी स्थान को पहाड़ी या मैदानी मानने का स्पष्ट आधार नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अपनाए गए वर्गीकरण के मानदंड बताने को कहा है।
अदालत ने निदेशक, विद्यालयी शिक्षा तथा कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के अपर निदेशकों को उन शिक्षकों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं, जिनके स्थानांतरण अनुरोध ऐसे प्रमाणपत्रों के आधार पर स्वीकार किए गए।
अदालत ने इस संदर्भ में शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति के निर्णय के संबंध में भी जानकारी देने को कहा है कि विभाग की ओर से उस पर क्या निर्णय लिया गया है।
याचिकाकर्ता जीवन सिंह की ओर से शिक्षकों के मध्य-सत्र में वार्षिक स्थानांतरण पर सवाल उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डाभर दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है और वहां शिक्षकों के पद पहले से ही रिक्त हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसके बच्चे की पढ़ाई भी इसी विद्यालय में हो रही है और शिक्षकों के स्थानांतरण से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
याचिका में उत्तराखंड वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 का हवाला देते हुए कहा गया कि अधिनियम की धारा 17(1)(बी) के तहत अनुरोध पर स्थानांतरण की प्रक्रिया स्थानांतरण समिति के माध्यम से निर्धारित तरीके से होनी चाहिए। साथ ही धारा 23 में वार्षिक स्थानांतरण के लिए समय-सारिणी निर्धारित है।
याचिका में विशेष रूप से कहा गया कि राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डाभर में सात सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड तैनात हैं। इनमें से चार शिक्षकों ने अनुरोध पर स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। यदि इन चारों का स्थानांतरण हो जाता है तो विद्यालय में केवल तीन सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड रह जाएंगे। याचिकाकर्ता ने इसे विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित के प्रतिकूल बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा के अधिकार अधिनियम की भावना भी प्रभावित होगी।
याचिकाकर्ता ने अदालत से विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए अनुरोध पर वार्षिक स्थानांतरण की प्रक्रिया को रद्द करने अथवा उस पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने इस मामले में 07 सितंबर को सुनवाई की लेकिन आदेश की प्रति आज उपलब्ध हुई।
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