भुवनेश्वर , सितंबर 25 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने संबलपुर जिले के धनकौड़ा ब्लॉक में पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए तीन सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों की पदोन्नति के लिए ओटीईटी लागू होने के मुद्दे पर ओडिशा सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

न्यायमूर्ति आरके पटनायक की पीठ ने संबलपुर जिले के निरगुंडापाड़ा सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में लेवल-4 के प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक बबरूबाहन भोई की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।

न्यायालय ने अगले आदेश तक संबलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और धनकौड़ा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को अंतिम वरिष्ठता सूची तथा तीन सितंबर को प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के अनुमोदन आदेश के आधार पर लेवल-4 के शिक्षकों को लेवल-3 के वरिष्ठ प्रधानाध्यापक पदों पर पदोन्नत करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्देश दिया।

इस मामले की अंतिम सुनवाई नौ नवंबर तय की गयी है।

वरिष्ठता सूची में 77वें स्थान पर मौजूद भोई को ओडिशा शिक्षक पात्रता परीक्षा पास न करने के कारण अंतिम पदोन्नति सूची से बाहर कर दिया गया था।उन्होंने संबलपुर डीईओ के फैसले और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के निर्देश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि तीन सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर ओटीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं होनी चाहिए। यूपी बनाम इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने दलील दी कि कट-ऑफ तारीख से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य नहीं है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं डॉ. पुरुषोत्तम चुली और प्रीति पुण्यतोया ने भी इस तर्क के समर्थन में नौ जुलाई 2026 को बॉम्बे उच्च न्यायालय के दिये गये फैसले की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया।

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को विशेष रूप से यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या तीन सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी ओटीईटी की अनिवार्यता लागू होती है या नहीं।

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