चंडीगढ़ , नवंबर 17 -- शिरोमणि अकाली दल ने सोमवार को तरनतारन हलके में अकाली कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर और राजनीतिक बदलाखोरी के तहत गिरफ्तार करने पर चुनाव आयोग को शिकायत दर्ज कराई है।

चुनाव आयोग को दी गई लिखित शिकायत में अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा है कि पंजाब सरकार ने 21-तरनतारन उपचुनाव के दौरान सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग किया है। इन उल्लंघनों के संबंध में अकाली दल ने चुनाव आयोग और उसके पर्यवेक्षकों को कई लिखित शिकायतें दी हैं। वरिष्ठ अकाली नेता ने कहा कि पार्टी तरनतारन जिले के दो डीएसपी और एक एसएचओ के तबादले और एसएसपी को निलंबित करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग की शुक्रगुजार है। उन्होने कहा कि आयोग की इन कार्रवाईयों के बावजूद, राज्य सरकार अकाली दल के कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है। सरपंचों, नगर पार्षदों , पूर्व नगर पार्षदों और व्यापारियों को सरेआम धमकी दी गई कि वे सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार हरमीत सिंह संधू का समर्थन करें यां परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

डाॅ. चीमा ने कहा कि मतदान के दिन कई अकाली नेताओं को पुलिस थानों में ले जाया गया और कईयों के घरों में छापे मारे गए, जिससे उनके परिवारों को अपमानित होना पड़ा। इन घटनाओं की सूचना मौखिक रूप से एसएसपी, आरओ और मुख्य चुनाव अधिकारी, पंजाब को दे दी गई थी।

वरिष्ठ अकाली नेता ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले और निलंबन के बाद सत्तारूढ़ पार्टी ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और दबाव में न आने वाले अकाली नेताओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उन्होने आगे बताया कि चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद अकाली नेताओं के खिलाफ झूठे केस दर्ज किए गए और गिरफ्तारियां भी की गई। ऐसी ही एक एफआईआर थाना सिटी, तरनतारन में बीएनएस की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई ।

डाॅ. चीमा ने कहा कि अकाली दल ने पहले ही छह नवंबर को उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सबूतों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिन्होने उम्मीदवार की बेटी का नकली नंबर प्लेट वाली निजी कार में संदिग्ध रूप से पीछा किया था। शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस ने बदले की कार्रवाई करते हुए शिकायतकर्ताओं को ही एफआईआर में फंसा दिया और नछतर सिंह जैसे नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।

डाॅ. चीमा ने कहा कि पार्टी सभी एफआईआर की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच और राज्य सरकार, आम आदमी पार्टी और सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करती है, ताकि भारत के चुनाव आयोग में जनता का विश्वास बहाल किया जा सके।

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