चंडीगढ़ , अक्टूबर 29 -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पांच नवंबर को अंबाला छावनी में निर्मित 'आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक-1857' का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद गांधी ग्राउंड में जनसभा आयोजित की जाएगी।
हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने गुरुवार को यह जानकारी दी। श्री विज ने अंबाला छावनी स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि लगभग 22 एकड़ में फैले इस स्मारक में 1857 की क्रांति से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। स्मारक में कुल 22 गैलरियां बनाई गई हैं। इनमें स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न पहलुओं और गुमनाम क्रांतिकारियों के योगदान को दर्शाया जाएगा।
श्री विज ने बताया कि इतिहासकारों की समिति के सहयोग से शोध के बाद लगभग 700 शहीदों के नाम संकलित किए गए हैं। इनके नाम, पिता का नाम और गांव का विवरण सुनहरे अक्षरों में अंकित किया जाएगा। भविष्य में प्रमाणों के आधार पर अन्य शहीदों के नाम भी शामिल किए जा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को सरकारी खर्च पर स्मारक का भ्रमण कराया जाएगा। स्कूलों के बच्चों को भी यहां लाने की योजना है, ताकि नई पीढ़ी स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और बलिदानियों के योगदान से परिचित हो सके।
श्रम मंत्री ने कहा कि इतिहासकार डॉ. के.सी. यादव के शोध और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 1857 की क्रांति में अंबाला छावनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उनके अनुसार, 10 मई 1857 को अंबाला में सैनिकों की गतिविधियां मेरठ की क्रांति से लगभग नौ घंटे पहले शुरू हुई थीं। उन्होंने राष्ट्रीय अभिलेखागार के एक दस्तावेज का हवाला देते हुए सितंबर 1857 में अंबाला छावनी में हुई एक घटना का उल्लेख किया। विज के अनुसार, उस घटना में 135 सैनिक मारे गए, 33 को बंदी बनाया गया और करीब 40 सैनिक भागने में सफल रहे।
उन्होंने बताया कि स्मारक परिसर में 63 मीटर ऊंचा कमल का फूल बनाया गया है, जिसमें दो हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं। परिसर में 1857 की क्रांति में कमल के फूल और रोटी की संदेशवाहक के रूप में भूमिका को भी प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उस दौर में इन प्रतीकों के माध्यम से सैनिक टुकड़ियों के बीच संदेश पहुंचाए जाते थे। स्मारक में गुमनाम शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष गैलरी भी बनाई गई है। श्री विज के अनुसार, यहां एक समय में लगभग 40 लोग श्रद्धांजलि दे सकेंगे। इस प्रक्रिया को विशेष तकनीक से जोड़ा गया है।
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