कोलकाता , मई 26 -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 'पहचानो-मिटाओ-वापस भेजो' की नीति के तहत घुसपैठ पर पूर्ण रोक लगाने के लिए आगामी 15 जून को पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे।

श्री शाह के इस दौरे का मकसद सरकार की "पहचानो-मिटाओ-वापस भेजो" नीति के कार्यान्वयन की समीक्षा करना और भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था का जायज़ा लेना है।

केंद्र सरकार ने घुसपैठियों की पहचान करने, आधिकारिक रिकॉर्ड से उनके नाम हटाने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक तीन-सूत्रीय रणनीति अपनाई है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार बंगाल और अन्य सीमावर्ती राज्यों में यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। श्री शाह का यह आगामी दौरा सीमा निगरानी को और मज़बूत करने तथा अवैध प्रवासन के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों को रोकने के लिए चलाए जा रहे एक बड़े राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने चार राज्यों को कवर करते हुए एक राष्ट्रव्यापी सीमा दौरा शुरू किया है। वह मंगलवार को राजस्थान के बीकानेर से अपना दौरा शुरू करते हुए सीमा पर बुनियादी ढांचे और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा, सीमावर्ती ज़िलों में वह ज़िलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अधिकारियों और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठकें भी करेंगे।

श्री शाह 15 जून को पश्चिम बंगाल के दौरे के दौरान भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित बीएसएफ की सीमा चौकियों का निरीक्षण करेंगे और ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करेंगे। .सूत्रों ने बताया कि वे सीमावर्ती ज़िलों में तैनात ज़िला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ भी बैठकें करेंगे। यह दौरा श्री शाह द्वारा केंद्र सरकार की "स्मार्ट बॉर्डर" पहल की घोषणा किए जाने के कुछ ही दिनों बाद हो रहा है। इस पहल का उद्देश्य सीमा के संवेदनशील हिस्सों को तकनीकी रूप से उन्नत बनाना और वहां से घुसपैठ करना और भी मुश्किल बनाना है। इसमें उन्नत निगरानी प्रणालियां, एकीकृत निगरानी तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय शामिल होने की उम्मीद है।

अधिकारियों ने संकेत दिया कि श्री शाह ने बीएसएफ और स्थानीय पुलिस प्रशासन को पहले ही निर्देश दे दिए हैं कि वे सीमा सुरक्षा को और मज़बूत करने तथा घुसपैठ को रोकने के लिए मिलकर काम करें।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि श्री शाह का बंगाल दौरा काफी महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य सरकार ने सीमा पर बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के लिए बीएसएफ को ज़मीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सूत्रों ने आगे बताया कि चार सीमावर्ती राज्यों का दौरा पूरा करने के बाद श्री शाह के पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के मुख्यमंत्रियों के साथ "स्मार्ट बॉर्डर" परियोजना के कार्यान्वयन के संबंध में बैठकें करने की संभावना है। इस बीच, उत्तरी 24 परगना ज़िले के बशीरहाट सब-डिवीजन में हकीमपुर सीमा चौकी पर नयी हलचल देखी गई है। आज सुबह, कई संदिग्ध अवैध प्रवासियों को बीएसएफ चौकी के पास ट्रॉली, कंबल और घर के सामान के साथ इंतज़ार करते देखा गया। ऐसा लग रहा था कि वे बांग्लादेश में घुसने की उम्मीद कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के समूह चौकी के पास प्लास्टिक के अस्थायी शेल्टर के नीचे जमा हो गए थे और सीमा की ओर बढ़ने की मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि सोमवार को भी ऐसे ही दृश्य देखे गए थे, जब लगभग 100 संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठिए कथित तौर पर ट्रांज़िट कैंप के पास जमा हो गए थे, जबकि 30 से 40 अन्य लोग बाहर इंतज़ार कर रहे थे। यह नयी हलचल तब शुरू हुई, जब राज्य सरकार ने ज़िला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे उन लोगों के लिए "होल्डिंग सेंटर" या हिरासत केंद्र स्थापित करें, जिन्हें अवैध बांग्लादेशी प्रवासी या रोहिंग्या होने के शक में हिरासत में लिया गया है।

अधिकारियों का मानना है कि इस घोषणा से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों में घबराहट फैल गई है।

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