नयी दिल्ली , फरवरी 05 -- केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यहां देश की पहली सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा 'भारत टैक्सी'का औपचारिक शुभांरभ किया।

इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए मालिकाना हक का एक मॉडल तैयार कर रहा है। तीन साल के अंदर कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामख्या तक सहकार टैक्सी हमारे टैक्सी सार्थियों के कल्याण का एक बहुत बड़ा माध्यम बन जाएगी। पहली बार जब उन्होंने संसद के सामने सहकार टैक्सी का विषय रखा तो बहुत सारे लोगों, खासकर टैक्सी परिचालन से जुड़ी कंपनियों, ने सवाल उठाया कि सरकार टैक्सी के क्षेत्र में क्यों प्रवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को 'सहकार' और 'सरकार' के बीच का भेद नहीं मालूम है। सरकार टैक्सी के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर रही, बल्कि सहकार (सहयोग) टैक्सी के क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि शायद पूरी दुनिया में पहली बार ऐसी अनूठी कंपनी अस्तित्व में आ रही है, जिसका असली मालिक कोई व्यक्ति या बाहरी कंपनी नहीं, बल्कि टैक्सी चलाने वाला सारथी ही है। सहकार टैक्सी से जुड़े हर एक सारथी भाई-बहन ही इस सहकारी टैक्सी समिति के सच्चे मालिक हैं। यह संकल्पना सहकार टैक्सी से जुड़ने वाले सारथियों के जीवन, आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिति में आमूल-चूल परिवर्तन लाने वाली है। उन्होंने कहा , "हमारे देश में पहले ऐसे कई मॉडल सफल हो चुके हैं। सिर्फ 11 दूध उत्पादकों ने अमूल की शुरुआत की थी। आज गुजरात में 36 लाख से अधिक पशुपालक महिलाओं का विशाल वटवृक्ष खड़ा हो चुका है। यह पशुपालक महिलाएं सवा लाख करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार करती हैं। यह मॉडल दर्शाता है कि जब आम लोग स्वयं मालिक बनते हैं, तो छोटी शुरुआत भी बहुत बड़े परिणाम दे सकती है। शुपालक बहनें आज दूध बेचकर एक करोड़ रुपए तक की सालाना कमाई कर रही हैं, जो सहकारी मॉडल का कमाल है।"श्री शाह ने टैक्सी सारथियों से अपील की कि वे अभी भी टैक्सी चलाते हैं, सहकार टैक्सी से जुड़ने के बाद भी टैक्सी चलाएँगे, लेकिन दोनों में एक बड़ा फर्क होगा। उन्होंने कहा कि अभी टैक्सी का पहिया किसी और की जेब में पैसे डालता है, लेकिन अब सारथियों की टैक्सी के पहिये की कमाई सारथियों की जेब में ही जाएगी। देश में कई विश्व-स्तरीय सहकारी मॉडल खड़े हो चुके हैं, जिनमें अमूल, इफको, कृभको जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इनमें से किसी भी सहकारी संस्था में शुरूआती पूंजी बहुत बड़ी नहीं थी। इसी तरह सहकार टैक्सी में सबसे बड़ी शेयर पूंजी सिर्फ 500 रुपये है और वही 500 रुपये सारथियों को असली मालिक का दर्जा दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह छोटी सी राशि टैक्सी सारथियों की मेहनत, आत्मसम्मान और उनकी आर्थिक आजादी की नींव बनने जा रही है।

उन्होंने कहा कि हर पाँच साल पर होने वाले चुनाव के बाद टैक्सी सारथियों द्वारा चुने गए दो प्रतिनिधि बोर्ड में बैठेंगे। वे ही उनके हितों की देखभाल करेंगे और उनके लिए फैसले करेंगे। यही सहकारिता की आत्मा और सच्चे मालिकाना हक की भावना है। सहकार टैक्सी कुल मुनाफे में सिर्फ 20 फीसदी पैसे ही अपने पास रखेगी, यानि 100 रुपए में से 20 रुपए ही सहकार टैक्सी अपने पास रखेगी, जिसके मालिक सारथी ही हैं। सारा मुनाफा भारत टैक्सी से जुड़े सारथी के अकाउंट में ही जाएगा। भारत टैक्सी के पूंजी खाते में पड़े 20 रुपए के मालिक भी सारथी ही होंगे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत टैक्सी की कल्पना मौजूदा तीनों प्रकार के टैक्सी वाहनों को एक साथ जोड़कर की गई है जिसमें चार पहिया टैक्सी, तीन पहिया और दो पहिया वाहन शामिल हैं। उन्होंने देश की मातृ शक्ति को संदेश दिया कि भारत टैक्सी उनकी सुरक्षा को सर्वोपरि रखेगी। उन्होंने कहा, "हमने सारथी दीदी की एक खास संकल्पना तैयार की है जिसके तहत आने वाले समय में ऐप में 'सारथी दीदी' के लिए एक अलग विंडो होगी, जिसके जरिए रजिस्ट्रेशन कराने वाली किसी भी महिला को केवल 'सारथी दीदी' ही पिक करने आएंगी। 'सारथी दीदी' दो पहिया वाहन लेकर आएंगी और बहुत कम किराए में सुरक्षित रूप से गंतव्य तक पहुंचाएंगी। यह सुविधा महिलाओं के लिए बहुत बड़ी और व्यावहारिक राहत साबित होगी। आने वाले दिनों में सारथी दीदी के माध्यम से देश की मातृ शक्ति को एक सुरक्षित, किफायती और सम्मानजनक यात्रा का विकल्प उपलब्ध होगा। यह सिर्फ एक सेवा नहीं बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

श्री शाह ने बताया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल निगम, एयरपोर्ट अथॉरिटी, इफको टोक्यो इंश्योरेंस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित कुल नौ प्रमुख संस्थाओं के साथ भारत टैक्सी ने समझौता (एमओयू) किया है। इन समझौतों के जरिए भारत टैक्सी के ग्राहकों को कई अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी और साथ ही इन सभी संस्थाओं को भारत टैक्सी की सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएँ अब सहकार टैक्सी की सफलता में हिस्सेदार बन चुकी हैं। यह स्वामित्व मॉडल पर आधारित नया टैक्सी कॉन्सेप्ट आज पहली बार भारत में लॉन्च किया गया है, जो न केवल सारथियों के लिए मालिकाना हक की भावना लाता है, बल्कि यात्रियों और विभिन्न संस्थाओं के लिए भी एक भरोसेमंद और सुविधाजनक विकल्प प्रस्तुत करता है।

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