कोलकाता , मार्च 28 -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस पर पिछड़े समुदायों की "व्यवस्थित उपेक्षा" का आरोप लगाते हुए शनिवार को यहां पश्चिम बंगाल की की सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इस आरोप-पत्र में पश्चिम बंगाल में तृणमूल के 15 साल के शासन के दौरान उस पर लगे आरोपों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
शहर के उत्तर-पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित न्यू टाउन के एक होटल से 35 पन्नों के इस आरोप पत्र को जारी करते हुए श्री शाह ने कहा कि यह दस्तावेज़ केवल भाजपा की नहीं, बल्कि बंगाल की जनता की आवाज़ को दर्शाता है।उन्होंने कहा, "हो सकता है कि तृणमूल इसे भाजपा का आरोप पत्र कहे, लेकिन असल में यह तृणमूल सरकार के खिलाफ़ बंगाल की जनता द्वारा दिया गया आरोप पत्र है, जिसे भाजपा ने एक स्वरूप दिया है।"इस आरोप-पत्र में भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य सेवा और पिछले 15 वर्षों में तृणमूल सरकार के समग्र प्रदर्शन सहित कई मुद्दों को शामिल किया गया है।
श्री शाह ने दावा किया कि पिछड़े वर्गों जिनमें मतुआ समुदाय भी शामिल है, के कई सदस्यों को राज्य सरकार की "पिछड़ा-विरोधी नीति" के कारण उपेक्षा का सामना करना पड़ा है। उन्होंने राज्य सरकार पर पिछड़े वर्गों के प्रति "अत्यधिक उदासीनता और भेदभाव" दिखाने का आरोप लगाया और मतदाताओं से आग्रह किया कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करें और मौजूदा शासन को समाप्त करें।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतुआ समुदाय के देवता के नाम को भी बिगाड़ दिया है, जिससे समुदाय की भावनाओं को संभालने के तरीके को लेकर सत्ताधारी दल की आलोचना और तेज़ हो गयी है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि बंगाल में होने वाला आगामी चुनाव राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने इसे बंगाल के लिए एक "मुक्ति चुनाव" के रूप में पेश किया। उन्होंने दावा किया कि आबादी का एक हिस्सा अपनी ही ज़मीन पर अल्पसंख्यक बन जाने से डरता है, जिसका कारण उन्होंने कृत्रिम जनसांख्यिकीय परिवर्तन को बताया। उन्होंने कहा, "15 वर्षों से, बंगाल ने डर, आतंक, भ्रष्टाचार, झूठ और विभाजन की राजनीति देखी है। भाजपा 2011 से ही इसके खिलाफ लड़ रही है।"केंद्रीय मंत्री ने कहा, "उद्योग-धंधे ठप हो गए हैं, विकास की गति धीमी पड़ गई है, और सिंडिकेट राज, कट-मनी की प्रथाओं और तुष्टीकरण की राजनीति ने आम नागरिकों का जीवन मुश्किल बना दिया है... मुझे विश्वास है कि इस बार बंगाल की जनता भाजपा की सरकार बनाएगी।" उन्होंने कहा, "राज्य में घुसपैठियों को संरक्षण दिया जा रहा है। इस मामले में वामपंथी शासन बेहतर था। हम न केवल घुसपैठियों को मतदाता सूची से हटाने के लिए, बल्कि उन्हें देश से ही बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बंगाल की जनता से हमारा वादा है। घुसपैठ केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है। यह गरीबों को उनके हक के संसाधनों से भी वंचित कर रहा है।"उन्होंने आरोप लगाया कि जहाँ भाजपा शासन के तहत पड़ोसी राज्य असम में घुसपैठ पर रोक लगा दी गई है, वहीं पश्चिम बंगाल एकमात्र बचा हुआ गलियारा बन गया है, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा, "हर रोज़ घुसपैठिए घुस रहे हैं। क्या ममता जी की सरकार सो रही है? आप पूछ सकते हैं कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) क्या कर रही है, लेकिन वह तभी कार्रवाई कर सकती है जब बाड़ लगाने की अनुमति हो।
श्री शाह ने वादा किया कि सरकार बनाने के 15 दिनों के भीतर भाजपा सीमा पर बाड़ लगाने के लिए ज़रूरी ज़मीन उपलब्ध कराएगी।" भाजपा के बढ़ते वोट बैंक का ब्योरा देते हुए श्री शाह कहा, "2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को 17 प्रतिशत वोट और दो सीटें मिली थीं, जो 2019 में बढ़कर 41 प्रतिशत वोट और 18 सीटें हो गईं। 2024 में, पार्टी को 39 प्रतिशत वोट और 12 सीटें मिलीं।"उन्होंने कहा, "पिछले विधानसभा चुनावों में हमारा वोट शेयर 38 प्रतिशत और सीटें 77 थीं। भाजपा ने बंगाल में लगभग 40 प्रतिशत वोट शेयर का आधार बना लिया है।" मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर ) से जुड़े विवाद पर उन्होंने सवाल उठाया कि बंगाल में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई कि न्यायिक हस्तक्षेप की ज़रूरत पड़ी, जबकि तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में इसी तरह की प्रक्रियाएँ बिना किसी अदालती मामले के पूरी हो गईं।
श्री शाह ने कहा, "कई जगहों पर एसआईआर का काम बिना न्यायिक अधिकारियों की ज़रूरत के ही पूरा हो गया। तमिलनाडु और केरल में कोई अदालती मामले सामने नहीं आए। बंगाल में ऐसा क्या हुआ कि उच्चतम न्यायालय को न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ी?" महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए शाह ने आरजी कर अस्पताल, संदेशखाली और कसबा लॉ कॉलेज जैसी घटनाओं का ज़िक्र किया और दावा किया कि महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद बंगाल में महिलाओं की हालत देश में सबसे खराब हालात में से एक है।
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