बैतूल , अगस्त 09 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के शाहपुर नगर परिषद क्षेत्र में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से संचालित अमृत-2.0 पेयजल परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बरबटपुर में निर्माणाधीन जल उपचार संयंत्र के लिए कथित रूप से शासकीय डेम क्षेत्र से मुरम के अवैध उत्खनन की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शाहपुर से की गई है।

शिकायतकर्ता सचिन गुसा ने लिखित आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, बरबटपुर में अमृत-2.0 योजना के तहत बनाए जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य में उपयोग के लिए शासकीय डेम क्षेत्र से जेसीबी मशीनों के जरिए मुरम निकाली जा रही है।

आरोप है कि उत्खनन के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से मुरम को निर्माण स्थल तक पहुंचाया जा रहा है और इसका उपयोग भराव तथा जमीन के समतलीकरण के लिए किया जा रहा है। शिकायत में दावा किया गया है कि कथित उत्खनन की गतिविधियां पिछले कई दिनों से जारी हैं।

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाने की मांग की है कि निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही मुरम किस स्थान से लाई जा रही है और उसके उत्खनन एवं परिवहन के लिए संबंधित एजेंसी के पास आवश्यक वैधानिक अनुमति है या नहीं।

आवेदन में वर्षाकाल के दौरान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि बिना अनुमति शासकीय भूमि अथवा डेम क्षेत्र से खनिज सामग्री का उत्खनन किया जा रहा है तो संबंधित विभागों को तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।

अमृत-2.0 परियोजना को लेकर इससे पहले भी काम की गति और निर्माण कार्य में देरी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शहर में विभिन्न स्थानों पर अधूरे निर्माण तथा परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों के बीच अब निर्माण सामग्री के स्रोत को लेकर सामने आई शिकायत ने प्रशासन के समक्ष एक और जांच का विषय खड़ा कर दिया है।

शिकायत के बाद अब राजस्व एवं खनिज विभाग की कार्रवाई पर नजर है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित निर्माण एजेंसी अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

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