बैतूल , अगस्त 14 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शासन के 05 मई 2021 के आदेश में कम नामांकन, कम ट्रेड और अपेक्षाकृत कम प्लेसमेंट वाली आईटीआई के उन्नयन की परिकल्पना की गई थी, लेकिन जिले में अब अधिक ट्रेड और बेहतर नामांकन वाली संस्थाएं भी निजी हाथों में सौंपे जाने की जद में हैं। इससे इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए सरकारी स्तर पर कौशल प्रशिक्षण का अवसर सीमित होने की आशंका है।
तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, भोपाल के 05 मई 2021 के आदेश के अनुसार ऐसी आईटीआई, जहां एक से तीन ट्रेड संचालित हैं और प्रशिक्षणार्थियों की नामांकन एवं प्लेसमेंट दर अपेक्षाकृत कम है, उन्हें विशेष आईटीआई के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। आदेश में प्रत्येक जिले में एक आईटीआई को विशेष आईटीआई के रूप में उन्नयन किए जाने की बात कही गई थी। इसके लिए संचयी प्रशिक्षण क्षमता, सुनिश्चित प्लेसमेंट और कौशल ऋण वित्त पोषण जैसी व्यवस्थाओं के साथ विशेष व्यवस्था विकसित करने का प्रावधान था।
जिले में इस व्यवस्था को लेकर अब सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि शाहपुर और भीमपुर आईटीआई को परम फाउंडेशन को सौंपने का निर्णय लिया गया है। दोनों संस्थाओं में तीन से अधिक ट्रेड संचालित हैं और विद्यार्थियों का नामांकन भी अपेक्षाकृत बेहतर है। इससे पहले घोड़ाडोंगरी आईटीआई को भी परम फाउंडेशन को सौंपा जा चुका है।
भीमपुर आईटीआई में इलेक्ट्रॉनिक्स, फिटर, सोलर, कॉस्मेटोलॉजी, सीओपीए, मेकाट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन समेत सात ट्रेड संचालित हैं। यहां इस वर्ष करीब 190 विद्यार्थियों का नामांकन है। वहीं शाहपुर आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन, सीओपीए, वेल्डर, डीजल मैकेनिक, फिटर और ड्रोन टेक्नीशियन सहित छह ट्रेड हैं। यहां 176 सीटें हैं और पिछले वर्ष सभी सीटें भर गई थीं। इस वर्ष भी सीटें भरने की संभावना जताई जा रही है।
घोड़ाडोंगरी आईटीआई को निजी संस्था को सौंपे जाने के बाद क्षेत्र में सरकारी आईटीआई का विकल्प समाप्त हो गया है। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण की सुविधा नहीं होने से विद्यार्थियों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। शाहपुर और भीमपुर आईटीआई के साथ भी ऐसी स्थिति बनने की आशंका है।
ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए दूसरे शहर में जाकर प्रशिक्षण लेना आसान नहीं होगा। आवागमन, किराया, भोजन और आवास का अतिरिक्त खर्च कई परिवारों की क्षमता से बाहर हो सकता है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी कौशल प्रशिक्षण से ही दूर हो सकते हैं।
घोड़ाडोंगरी में सरकारी आईटीआई पहले ही बंद हो चुकी है। अब शाहपुर आईटीआई भी निजी हाथों में जाने की स्थिति में घोड़ाडोंगरी और शाहपुर दोनों ब्लॉकों में सरकारी आईटीआई नहीं बचेगी। इन दोनों ब्लॉकों में करीब 350 गांव और लगभग चार लाख की आबादी है। वहीं आदिवासी बहुल भीमपुर में भी आईटीआई के निजी हाथों में जाने से स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी प्रशिक्षण की सुविधा समाप्त हो सकती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि शासन के मूल आदेश में कम नामांकन और सीमित ट्रेड वाली आईटीआई को विशेष आईटीआई के रूप में विकसित करने की बात थी, तो बेहतर नामांकन और अधिक ट्रेड संचालित करने वाली शाहपुर तथा भीमपुर आईटीआई को निजी संस्था को सौंपने का आधार क्या है। विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों की मांग है कि शासन इस निर्णय की समीक्षा कर सरकारी आईटीआई को स्थानीय स्तर पर ही मजबूत करे, ताकि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों से वंचित न होना पड़े।
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