वाराणसी , अगस्त 28 -- रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को काशी में श्रावणी उपाकर्म की प्राचीन वैदिक परंपरा को शास्त्रोक्त विधि से संपन्न किया गया। अहिल्याबाई घाट पर विप्र समाज उत्तर प्रदेश और अति प्राचीन संस्था शास्त्रार्थ महाविद्यालय, दशाश्वमेध के संयुक्त तत्वावधान में शुक्ल यजुर्वेदीय माध्यंदिनी शाखा के ब्राह्मणों ने श्रावणी उपाकर्म किया।

वैदिक पं. विकास दीक्षित के आचार्यत्व में सर्वप्रथम हेमाद्रि संकल्प लिया गया। इस दौरान सृष्टि की उत्पत्ति से वर्तमान काल तक के कालखंड, भारतवर्ष की पवित्र नदियों, पर्वतों तथा वर्तमान संवत्सर, अयन, ऋतु, मास, तिथि और नक्षत्र आदि का वैदिक विधि से संकल्प किया गया। इसके माध्यम से वर्षभर में जाने-अनजाने हुए कायिक, वाचिक और मानसिक दोषों के निवारण की प्रार्थना की गई।

इसके बाद दशविध स्नान, पंचगव्य सेवन, भस्मलेपन तथा अपामार्ग, कुशा और दूर्वा का नियमानुसार प्रयोग किया गया। गंगा स्नान, तर्पण और आत्मशुद्धि की क्रियाओं के बाद शास्त्रार्थ महाविद्यालय के सरस्वती भवन में सप्तऋषि पूजन किया गया तथा वर्षभर धारण किए जाने वाले यज्ञोपवीत को अभिमंत्रित किया गया।

शास्त्रार्थ महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं संस्कृत महाविद्यालय प्राध्यापक समिति उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. गणेश दत्त शास्त्री ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म की परंपरा प्राचीन काल से नदियों और तीर्थों के तट पर चली आ रही है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग काशी आकर इस परंपरा में शामिल होते हैं।

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