बैतूल , अगस्त 23 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले को खेलों का हब बनाने के प्रयासों के बीच शालेय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी में बैतूल पिछड़ता नजर आ रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल जिले में विभिन्न खेलों के लिए स्टेडियम और मैदान विकसित कराने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा जारी संभागीय एवं राज्य स्तरीय शालेय खेलकूद प्रतियोगिताओं के कार्यक्रम में बैतूल को सत्र 2026-27 में एक भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता की मेजबानी नहीं मिली है।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस सत्र में प्रदेशभर में 83 प्रकार के खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इनमें अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 आयु वर्ग में बालक-बालिकाओं की अलग-अलग स्पर्धाएं शामिल हैं। प्रतियोगिताएं शालेय स्तर से शुरू होकर ब्लॉक, जिला, संभाग और राज्य स्तर तक आयोजित होती हैं। राज्य स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए मध्यप्रदेश की टीम में किया जाता है।
संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, नर्मदापुरम संभाग द्वारा जारी खेल पंचांग में बैतूल को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता की मेजबानी नहीं दी गई है। प्रदेश के अन्य जिलों में राज्य स्तरीय स्पर्धाएं होंगी, जिनमें विभिन्न संभागों की टीमें भाग लेंगी। ऐसे में बैतूल के खिलाड़ियों को राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए दूसरे जिलों की यात्रा करनी होगी।
संभागीय स्तर पर भी बैतूल को अपेक्षाकृत कम प्रतियोगिताओं की मेजबानी मिली है। नर्मदापुरम संभाग के बैतूल, हरदा और नर्मदापुरम जिलों में होने वाली प्रतियोगिताओं में बैतूल को 20, हरदा को 23 और नर्मदापुरम को 37 स्पर्धाओं की मेजबानी मिली है। एथलेटिक्स की तीन प्रतियोगिताएं पाथाखेड़ा में प्रस्तावित हैं।
खेल जानकारों के अनुसार मेजबान खिलाड़ियों को घरेलू मैदान, परिचित वातावरण और दर्शकों के समर्थन का मनोवैज्ञानिक लाभ मिलता है। इससे उनके प्रदर्शन में सुधार के साथ अगले स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए चयन की संभावना भी बढ़ती है। बैतूल के खिलाड़ी इस लाभ से वंचित रहेंगे।
जिले में हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ, स्वीमिंग पूल, बैडमिंटन, फुटबॉल, क्रिकेट, वॉलीबाल, बास्केटबाल और हैंडबाल सहित विभिन्न खेलों के लिए मैदान और सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद राज्य स्तरीय शालेय प्रतियोगिता की मेजबानी नहीं मिलने से खेल आयोजन को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
खेल प्रेमियों का कहना है कि जिले में उपलब्ध खेल संसाधनों का बड़े आयोजनों के लिए बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। इससे बाहर से आने वाले खिलाड़ियों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा। ऐसे में खेलों का केंद्र बनाने के प्रयासों के बीच शालेय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी में बैतूल के पीछे रहने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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