कोलकाता , अप्रैल 08 -- पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले करोड़ों रुपये के शारदा चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन सभी मामलों में जमानत मिलने के बाद अब जेल से रिहा हो जाएंगे।
सुदीप्त सेन पिछले 12 साल और 11 महीने से प्रेसीडेंसी जेल में बंद हैं। बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने उन्हें राज्य पुलिस द्वारा दर्ज दो अंतिम मामलों में भी जमानत दे दी।
इस आदेश के बाद अब उनकी रिहाई में कोई कानूनी अड़चन नहीं बची है। अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों को पूरा करने के बाद उनकी रिहाई गुरुवार को होने की उम्मीद है।
सेन को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच किए जा रहे सभी मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी थी। सीबीआई ने कुल 76 मामलों में से चार मामलों को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया था और सेन ने उन सभी में जमानत हासिल कर ली थी। हालांकि, पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा बारासात थाने में दर्ज दो मामलों की वजह से उनकी रिहाई रुकी हुई थी। बुधवार के आदेश से यह आखिरी बाधा भी दूर हो गई।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया में देरी को लेकर राज्य सरकार और सीबीआई दोनों पर कड़ी नाराजगी जताई थी। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
आज पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए सभी बचे हुए मामलों में जमानत दे दी। अदालत में दी गई जानकारी के अनुसार, सारदा समूह के खिलाफ मूल रूप से 389 मामले दर्ज किए गए थे।
सेन को पहली बार 27 अप्रैल 2013 को बिधाननगर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच का एक हिस्सा सीबीआई को सौंप दिया गया था, जबकि बाकी मामलों की जांच राज्य पुलिस कर रही थी।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बेलियाघाटा से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार कुणाल घोष ने कहा कि यह पूरी तरह से एक कानूनी मामला है। उन्होंने कहा, "जमानत देना या न देना न्यायपालिका का अधिकार है। चूंकि अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है, इसलिए इस स्तर पर और कुछ कहने को नहीं है।"साल 2013 में सामने आए शारदा घोटाले ने पूरे पश्चिम बंगाल को हिलाकर रख दिया था। इसमें हजारों निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के आरोप लगे थे। घोटाला खुलने के बाद सेन अपनी सहयोगी देबजानी मुखर्जी के साथ फरार हो गए थे और बाद में उन्हें जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग से गिरफ्तार किया गया था।
देबजानी मुखर्जी को 2023 में कुछ समय के लिए पैरोल पर रिहा किया गया था, वहीं सेन गिरफ्तारी के बाद से लगातार हिरासत में थे। चुनाव से ठीक कुछ दिन पहले सेन की रिहाई की खबर ने राज्य में राजनीतिक बहस को फिर से गरमा दिया है।
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