नयी दिल्ली , सितंबर 27 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत शांति में विश्वास करता है और किसी देश की जमीन पर कब्जा नहीं चाहता, लेकिन शांति को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्थिरता चाहता है, पर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की कीमत पर नहीं। खतरा होने पर देश अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने को प्रतिबद्ध है।

श्री सिंह ने रविवार को यहां एक सम्मेलन में कहा कि भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों से बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। आतंकवाद को सरकारी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करने या आतंकवादियों को पनाह देने वाले देशों को स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश की आतंकवाद समर्थक नीति जारी रहने तक भारत को इसके खिलाफ सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार है।

श्री सिंह ने राष्ट्रीय एकता को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम् आधार बताते हुए धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने भारत के दृष्टिकोण के आधार 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'सबका साथ, सबका विकास' सहित सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा और संस्कृति को पांच रणनीतिक स्तंभ बताये।

उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ के लिए भरोसेमंद साझेदार और 'विश्व बंधु' के रूप में उभर रहा है। 'वैक्सीन मैत्री' के तहत 100 से अधिक देशों को 30 करोड़ से ज्यादा कोविड टीके दिये गये हैं। भारत ने दवाओं, डिजिटल भुगतान, विशेषज्ञता और संसाधनों के जरिए भी विकासशील देशों की मदद की है।

रक्षा आत्मनिर्भरता पर उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात 2013-14 के 686 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए हो गये हैं। अब 2029 तक 50,000 करोड़ रुपए के निर्यात का लक्ष्य है। वर्ष 2026-27 का रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपए है, जिसमें पूंजीगत खरीद बजट का करीब 75 प्रतिशत यानी 1.39 लाख करोड़ रुपए घरेलू उद्योग से खरीद के लिए रखा गया है।

उन्होंने कहा कि बदलते युद्ध स्वरूप को देखते हुए साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना युद्ध के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, स्वायत्त प्रणाली, क्वांटम और हाइपरसोनिक तकनीक में क्षमता बढ़ानी होगी। 509 रक्षा उपकरणों और प्रणालियों को स्वदेशीकरण सूची में शामिल किया गया है, जबकि डीपीएसयू की 5,417 वस्तुओं की सूची में करीब 3,300 का स्वदेशीकरण हो चुका है।

रक्षा क्षेत्र में 16,000 से अधिक एमएसएमई, स्टार्टअप, विश्वविद्यालय और शोध संस्थान जुड़े हैं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु रक्षा गलियारों में करीब 70,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। 'सृजन' के तहत करीब 33,000 आयातित वस्तुओं की पहचान हुई, जिनमें लगभग 15,700 का स्वदेशीकरण हो चुका है।

आई डेक्स के तहत इस वर्ष मार्च तक 676 स्टार्टअप और नवोन्मेषक जुड़े तथा 551 अनुबंध हुए। रक्षा मंत्री ने घोषणा की कि पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) विकसित तकनीक पात्र भारतीय उद्योगों को दी जाएगी, ताकि निजी कंपनियां उनका उत्पादन कर सकें। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ को अनुसंधान एवं विकास और उद्योग को उत्पादन में अधिक भूमिका देकर भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

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