धर्मशाला , जून 06 -- हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर के निर्माण के लिए लंबे समय से रुके फंड का मुद्दा उठाने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अतुल भारद्वाज और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का आभार जताया है।
श्री शांता कुमार ने एक बयान में कहा कि श्री भारद्वाज ने परिसर परियोजना के लिए 30 करोड़ रुपये प्रदान करने में राज्य सरकार की विफलता का मुद्दा लगातार उठाया था। उन्होंने कहा कि दलीलों की समीक्षा करने के बाद उच्च न्यायालय ने माना कि हिमाचल प्रदेश सरकार को यह राशि जारी करनी थी। अदालत ने स्पष्टीकरण मांगा है कि यह फंड कब तक जमा किया जायेगा।
राज्य सरकार की आलोचना करते हुए श्री शांता कुमार ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार के हिमाचल प्रदेश में विश्वविद्यालय की स्थापना किये जाने के करीब 14 साल बाद भी इसके मुख्य धर्मशाला परिसर का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
विश्वविद्यालय के स्थान को लेकर हुए विवाद को याद करते हुए उन्होंने कहा कि लंबी चर्चा के बाद केंद्र सरकार ने फैसला किया था कि विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर धर्मशाला में स्थापित किया जायेगा, जबकि दूसरा परिसर देहरा में बनेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले के बावजूद ध्यान देहरा की ओर केंद्रित करने के प्रयास जारी रहे। इसके परिणामस्वरूप उस परिसर के लिए राज्य सरकार का फंड उपलब्ध करा दिया गया है, जबकि धर्मशाला परियोजना तय किये गये 30 करोड़ रुपये से वंचित रह गयी।
श्री शांता कुमार ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से दो बार बात की थी। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार होते ही फंड जारी कर दिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में सरकार की ओर से वित्तीय स्थिति स्थिर होने का दावा किये जाने के बाद भी यह राशि जारी नहीं की गयी।
त्वरित कार्रवाई का आग्रह करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई से पहले 30 करोड़ रुपये जारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह सरकार और राज्य की जनता दोनों के हित में होगा।
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