अमृतसर , मार्च 09 -- शहीद भाई तारा सिंह जी वां की 300वीं शहीदी शताब्दी को समर्पित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब से 'गुरसिखा इको प्यार गुरमिता पुता भाईआ' नाम से खालसा मार्च, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्र-छाया और पंज प्यारों के नेतृत्व में सोमवार को रवाना हुआ।
यह खालसा मार्च विभिन्न पड़ावों से होता हुआ 11 मार्च को गुरुद्वारा शहीद भाई तारा सिंह जी, गांव वां, जिला तरनतारन में संपन्न होगा।
श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास के बाद नगर कीर्तन की रवानगी के समय श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को पालकी साहिब में सुशोभित किया।
इस अवसर पर बोलते हुए ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज्ज ने कहा कि शहीद भाई तारा सिंह जी वां ने अन्य शहीद सिंहों के साथ मिलकर जकारिया खान की फौज का डटकर मुकाबला किया और विजय प्राप्त की। शहीदों का यह इतिहास कौम (समुदाय) के लिए बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि खालसा मार्च का उद्देश्य सिखी प्रचार के साथ-साथ भाई तारा सिंह वां और अन्य शहीद सिंहों के इतिहास को संगत के बीच प्रचारित करना है।
उन्होंने बताया कि सिख पंथ की प्रतिनिधि संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा सिख संगत के सहयोग से शहीद भाई तारा सिंह वां की 300वीं शहीदी शताब्दी पंथक परंपराओं के अनुसार मनाई जा रही है, जिसके मुख्य समागम 11 से 14 मार्च तक गांव वां में होंगे। उन्होंने संगत से अधिक से अधिक संख्या में इन शताब्दी समारोहों में शामिल होने की अपील की।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित