पटना , मार्च 23 -- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी(भाकपा माले), छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) ने सोमवार को शहीदे आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और विभिन्न छात्र संगठनों के साथ पटना में भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ पूरे भारत में स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा देने वाली इन महान क्रांतिकारियों की शहादत को आज 95 वर्ष पूरे हो गए हैं। इंकलाब जिंदाबाद" और "साम्राज्यवाद का नाश हो" के नारे आज के दौर में और अधिक सार्थक हो उठे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह अपने समय के अग्रणी और दूरदर्शी क्रांतिकारी थे। बाल्यकाल में ही जलियांवाला बाग हत्याकांड के बर्बर अनुभव ने उनके भीतर आज़ादी की लौ को प्रज्वलित कर दिया। उनके चाचा अजीत सिंह के नेतृत्व में चला "पगड़ी संभाल जट्टा" आंदोलन भी उनके राजनीतिक विकास में महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत रहा।
वक्ताओं ने कहा कि खेतों, खलिहानों, कारखानों और समाज के हर कोने में शोषण के खिलाफ उठी आवाज़ों ने ही आज़ादी के आंदोलन को धार दी। व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में सफल हुई रूसी क्रांति से प्रेरित होकर भगत सिंह समाजवादी भारत का सपना देखते थे, जहां मेहनतकश जनता वास्तव में सत्ता की भागीदार हो।उन्होंने कहा कि देश की सत्ता कॉरपोरेट हितों और साम्राज्यवादी ताकतों के प्रभाव में काम कर रही है। अमेरिका-इजरायल की युद्धोन्मादी धुरी के साथ बढ़ती नजदीकियों ने भारत को आर्थिक संकट, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय अलगाव की ओर धकेल दिया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण लाखों भारतीय प्रवासी कामगार असुरक्षा के माहौल में फंसे हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि और व्यापार नीतियों के जरिए छोटे किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है।अमेरिका के साथ असमान व्यापार समझौते भारतीय कृषि को गंभीर संकट में डाल रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि 'हिंदू राष्ट्र' के नाम पर देश की रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों से समझौता किया जा रहा है, जिससे भारत अपने पारंपरिक मित्र देशों विशेषकर ईरान से दूर होता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है।
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