नयी दिल्ली , अक्टूबर 16 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया में ऐसे शहरों का निर्माण करने की आवश्यकता है जहाँ शहरी बुनियादी सुविधाओं में निवेश किया जा सके और जो वित्तीय रूप से मजबूत हों।

इसके लिए उन्होंने शहरी निकायों को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने के लिए उनकी लोखा-जोखा व्यवस्था , आय के स्रोतों की मजबूती, कर वसूली व्यवस्था की कुशलता और वित्तीय विवरण की शुद्धता जैसे कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को जरूरी बताया। उन्होंने कहा , ' हमें ऐसे शहर विकसित करने होंगे, जो निवेश के लिए आकर्षक हों और वित्तीय रूप से मजबूत भी हों।' वह बैंकाक में विश्वबैंक और अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष की वार्षिक बैठक के दौरान अलग से आयोजित एक सत्र को संबोधित कर रही थी जो शहरी विकास पर केंद्रित था। इस सत्र का विषय था- " शहरों को निवेश के लिए आकर्षक बनाने के लिए साझा प्रयास - नगरीय जल सुविधाओं के लिए निजी पूंजी जुटाना"।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस मामले में भारत का दृष्टिकोण सार्वजनिक निवेश, नगर निकायों की मजबूत वित्तीय स्थिति, विकास वित्त और निजी पूँजी के समन्वय पर आधारित होना चाहिए। इन सभी को एक साथ जोड़कर ही हम ऐसे शहरों का निर्माण कर पायेंगे, जो निवेश योग्य होने के साथ-साथ वित्तीय रूप से भी टिकाऊ हों।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में राज्य सरकारें, केंद्र सरकार और शहरों के स्थानीय निकाय परियोजनाओं को लागू करते हैं तथा राजस्व का प्रबंधन करते हैं। राष्ट्रीय संस्थान परियोजनाओं को तैयार करने और उनके लिए वित्तीय ढाँचा विकसित करने में सहायता करते हैं, जबकि विकास साझेदार विशेषज्ञता, वित्तपोषण और जोखिम साझा करने में सहयोग प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा, " निजी निवेशक भी पूँजी, तकनीक और परिचालन संबंधी विशेषज्ञता का योगदान दे सकते हैं, बशर्ते परियोजनाओं में स्पष्ट अनुबंध, भुगतान की विश्वसनीय व्यवस्था और जोखिमों का उचित बँटवारा सुनिश्चित किया गया हो।"श्रीमती सीतारण ने कहा कि आज शहरी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बहुत बढ़ गया है।आबादी का अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवाह के चलते यह दबाव और बढ़ा है। शहरी लोगों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए हमें व्यापक विचार-विमर्श और योजनाबद्ध प्रयासों की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि भारत इस समय बड़े शहरी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। विश्व बैंक की 2025 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश की शहरी आबादी वर्ष 2020 के लगभग 48 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2050 तक 95.1 करोड़ तक पहुंच जायेगी और उस समय तक आवश्यक शहरी बुनियादी ढाँचे तथा सेवाओं के विकास के लिए 2.4 लाख करोड़ अमेरिकी डॉल डॉलर से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी।

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा , " किसी शहर की निवेश के लिए तैयारी उसकी विश्वसनीय वित्तीय लेखा प्रणाली, स्वयं के राजस्व स्रोतों को मजबूत बनाने, परियोजनाओं की उचित तैयारी और सक्षम संस्थानों पर निर्भर करती है। संपत्ति कर के प्रभावी प्रशासन, करों की कुशल वसूली और पारदर्शी वित्तीय रिपोर्टिंग से शहर अपनी वित्तीय विश्वसनीयता स्थापित कर सकते हैं। इससे उन्हें उपयुक्त वित्तीय संसाधन प्राप्त करने में मदद मिलती है।"उन्होंने कहा कि वित्तीय मजबूती के लिए आवश्यक है कि शहरों के पास संचालन और रखरखाव के खर्चों को पूरा करने के लिए राजस्व का एक पूर्वानुमानित और विश्वसनीय स्रोत होना चाहिए। इसके लिए उचित उपयोगकर्ता शुल्क और आवश्यकता पड़ने पर लक्षित सब्सिडी की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि सेवाएँ आम लोगों की आर्थिक पहुँच में बनी रहें।

वित्त मंत्री ने कहा कि इसके अतिरिक्त, शहरों को ऐसी परियोजनाओं की एक मजबूत सूची तैयार करनी चाहिए, जिन्हें वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके। इन परियोजनाओं के लिए तकनीकी रूप से मजबूत डिजाइन, माँग का यथार्थवादी आकलन, पूरे जीवनचक्र की लागत का अनुमान तथा विश्वसनीय खरीद और क्रियान्वयन व्यवस्था आवश्यक है।

श्रीमती सीतारमण ने कहा कि भारत में शहरी अवसंरचना के विकास के लिए सार्वजनिक निवेश ढाँचा और विकास की पहलों का जिक्र कते हुए भारत ने राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों के साथ साझेदारी में संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से सार्वजनिक निवेश का एक व्यापक ढाँचा स्थापित किया है। इसी संदर्भ में उन्होंने अमृत योजना , स्मार्ट सिटी मिशन, स्वच्छ भारत मिशन के शहरी और ग्रामीण घटक तथा अन्य योजनाओं का जिक्र किया।

वित्त मंत्री ने बजट में एक लाख करोड़ रुपये के अर्बन चैलेंज फंड का भी उल्लेख किया जिसका उद्देश्य कुल 4 लाख करोड़ रुपये के शहरी निवेश को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बजट 2026-27 में पाँच वर्षों प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए 5,000 करोड़ रुपये की सहायता योजना का भी जिक्र किया।

श्रीमती सीतारणम ने कई निकायों के लिए मिले जुले वित्त प्रबंध की पूल्ड फाइनेंसिंग योजना के भी विकल्प के रूप में तमिलनाडु वॉटर एंड सैनिटेशन पूल्ड फंड इसका एक उदाहरण है। इसके माध्यम से 13 शहरी स्थानीय निकायों ने जलापूर्ति और स्वच्छता संबंधी बुनियादी ढाँचे के लिए एक संयुक्त बॉन्ड के जरिए धन जुटाया।

उन्होंने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष के दूसरे संस्करण में लगभग 30,000 करोड़ रुपये के कोष का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे शहरी बुनियादी ढाँचे और विद्युत वाहन जैसे उभरते क्षेत्रों को भी वित्तपोषण मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने जर्मनी के विकास बैंक केएफडब्ल्यू के सहयोग से भारत में अब तक चलायी गयी और वर्तमान में जारी परियोजनाओं के लिए लगभग दो अरब यूरो, यानी करीब 20,000 करोड़ रुपये की योजनाओं के वित्त पोषण को महत्वपूर्ण बताया । उन्होंने कहा कि इस तरह के इस सहयोग के तहत जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने में सक्षम शहरी बुनियादी ढाँचे के विकास को समर्थन मिला है।

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