मुरैना , मई 11 -- मध्यप्रदेश के मुरैना जिले स्थित त्रेतायुगीन प्रसिद्ध शनिचरा मंदिर (शनिमंदिर) में आगामी 15 और 16 मई को शनि जयंती एवं शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर आयोजित होने वाले विशाल मेले के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह शनि मंदिर देश के सबसे प्राचीन त्रेतायुगीन मंदिरों में से एक माना जाता है। यहां स्थापित शनिदेव की प्रतिमा को विशेष एवं अद्भुत बताया जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह प्रतिमा आसमान से गिरे उल्कापिंड से निर्मित मानी जाती है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी ने अपनी बुद्धिमत्ता से शनिदेव को लंकापति रावण के पैरों के नीचे से मुक्त कराया था। कई वर्षों तक दबे रहने के कारण शनिदेव दुर्बल हो चुके थे। लंका दहन के समय शनिदेव ने हनुमान जी से निवेदन किया कि जब तक वे लंका में रहेंगे, तब तक दहन संभव नहीं होगा। इसके बाद हनुमान जी ने शनिदेव को पूरी शक्ति से भारत भूमि पर फेंका, जहां वे मुरैना जिले के ऐंती ग्राम के समीप स्थित पर्वत पर आकर गिरे। इसी स्थान को शनि पर्वत या ऐंती पर्वत कहा जाता है।

शास्त्रों में उल्लेख है कि शनि पर्वत पर ही शनिदेव ने कठोर तपस्या कर पुनः शक्ति और बल प्राप्त किया था। जानकारी के अनुसार शनिदेव की प्रतिमा की स्थापना चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने कराई थी। प्रतिमा के सामने हनुमान जी की मूर्ति भी विक्रमादित्य द्वारा स्थापित कराई गई थी। वर्ष 1808 में तत्कालीन शासक दौलतराव सिंधिया द्वारा यहां जागीर प्रदान किए जाने का शिलालेख भी मंदिर परिसर में मौजूद है।

बताया गया है कि शनि सिंगणापुर (महाराष्ट्र) में स्थापित शिला भी शनिश्चरा पहाड़ी से ले जाकर स्थापित की गई थी। मंदिर के समीप पौड़ी वाले हनुमान जी की लेटी हुई एवं उभरी हुई प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। शनिश्चरा पहाड़ी एवं आसपास का क्षेत्र सिद्ध क्षेत्र माना जाता है।

मंदिर परिसर में पहाड़ी से अनवरत गुप्त गंगा की धारा प्रवाहित होती है तथा यहां स्थित गुफाओं में संतों द्वारा तपस्या किए जाने के प्रमाण आज भी दिखाई देते हैं। मंदिर के भीतर स्थित राधाकृष्ण मंदिर का जीर्णोद्धार कर छह जून 2011 को नई प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं।

मंदिर के आसपास मुरली मनोहर मंदिर, बटेश्वरा, पढ़ावली, मितावली, ककनमठ और कुन्तलपुर जैसे पुरातात्विक एवं धार्मिक महत्व के स्थल भी स्थित हैं, जिन्हें पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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