नयी दिल्ली , जनवरी 12 -- विश्व पुस्तक मेला की प्रमुख बिज़नेस-टू-बिज़नेस (बी2बी) पहल नई दिल्ली राइट्स टेबल (एनडीआरटी) का सोमवार को भारत मंडपम में शुभारंभ किया गया। इस पहल से पुस्तक मेले ने अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन व्यापार और अधिकार हस्तांरण (राइट्स एक्सचेंज) के महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा संचालित एनडीआरटी प्रकाशकों को विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों में अनुवाद तथा वितरण अधिकारों पर बातचीत के लिए एक सुव्यवस्थित बाज़ार उपलब्ध कराता है।
पेशेवर व्यावसायिक मंच के रूप में डिज़ाइन किए गए एनडीआरटी में कुल 85 प्रकाशक भाग ले रहे हैं, जिनमें लगभग 40 विदेशी प्रकाशक भी शामिल हैं। दो दिनों (12-13 जनवरी) में लगभग 600 पूर्व-निर्धारित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसके अंतर्गत आधे घंटे की बैठकों के माध्यम से प्रकाशकों को अधिकार हस्तांरण, सह-प्रकाशन के अवसरों तथा दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर मिल रहा है।
राइट्स टेबल का औपचारिक उद्घाटन क्लॉडिया कैसर उपाध्यक्ष, व्यापार विकास (वाइस प्रेसिडेंट बिज़नेस डेवलपमेंट), फ्रैंकफर्ट पुस्तक मेला द्वारा किया गया, जिसके साथ उच्चस्तरीय अधिकार चर्चाओं की शुरुआत हुई। उद्घाटन सत्र के दौरान एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक ने सुश्री क्लॉडिया कैसर का अभिनंदन किया।
एनबीटी अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने इस मौके पर कहा कि फ्रैंकफर्ट बुक फेयर ने पिछले कुछ वर्षों में बी2बी और बी2सी मॉडलों का सफलतापूर्वक समन्वय किया है। उन्होंने बताया कि एनबीटी का उद्देश्य भारत के भीतर तथा बाहर गुणवत्तापूर्ण साहित्य के आदान-प्रदान को सुगम बनाना है, जिससे वैश्विक साहित्यिक संवाद को मजबूती मिल सके। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस वर्ष एनडीआरटी के अंतर्गत भारतीय और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों के बीच 600 से अधिक बैठकों का आयोजन निर्धारित है।
इस अवसर पर सुश्री क्लॉडिया कैसर ने भारत और फ्रैंकफर्ट बुक फेयर के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को रेखांकित किया और स्मरण कराया कि 1980 के दशक में भारत मेले का गेस्ट ऑफ ऑनर बनने वाला पहला एशियाई देश था। उन्होंने कहा कि फ्रैंकफर्ट में समर्पित इंडिया पवेलियन तब से एक नियमित और महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। उन्होंने नई दिल्ली पुस्तक मेला के बढ़ते स्वरूप की सराहना करते हुए एनडीडब्ल्यूबीएफ 2026 को सभी पाठकों के लिए निःशुल्क और सुलभ बनाने की एनबीटी की पहल का स्वागत किया।
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