अबू धाबी , अप्रैल 28 -- ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की स्थिति के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मंगलवार को 'पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन' ओपेक और 'ओपेक प्लस' से एक मई से बाहर होने के अपने फैसले का ऐलान किया है।
लगभग 60 साल पुरानी साझेदारी को खत्म करने वाला यह फैसला मौजूदा ऊर्जा संकट के दौरान वैश्विक तेल बाजार पर ओपेक के दबदबे के लिए बड़ा झटका है।
यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी 'वाम' ने बताया कि यह फैसला यूएई के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण और उसकी बदलती ऊर्जा प्रोफाइल को दर्शाता है।
यूएई ने कहा, ''यह फैसला हमारे दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक विजन को दर्शाता है, जिसमें घरेलू ऊर्जा उत्पादन में निवेश को तेज करना शामिल है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक जिम्मेदार, भरोसेमंद और भविष्योन्मुखी भूमिका के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी पुख्ता करता है।''ओपेक से बाहर निकलने के बाद अब यूएई को अमेरिकी डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में तेल व्यापार की संभावनाएं तलाशने की अधिक आजादी मिल जायेगी।
ओपेक और ओपेक प्लस छोड़ने की घोषणा से पहले यूएई इस संगठन के सबसे प्रभावशाली सदस्यों में से एक था और सऊदी अरब एवं इराक के बाद तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश था।
यूएई के बाहर निकलने से ओपेक ने वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने वाला एक महत्वपूर्ण साधन खो दिया है, जिससे भविष्य में तेल की कीमतों में अनिश्चित उतार-चढ़ाव की संभावना बढ़ सकती है।वहीं ओपेक अपनी कुल उत्पादन क्षमता का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा खो देगा।
Bसंगठन छोड़ने के बाद यूएई अब उत्पादन के सख्त कोटा से बंधा नहीं रहेगा। उसने 'बाजार की फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिए' अपनी उत्पादन क्षमता को लगभग 40 लाख से बढ़ाकर 2027 तक 50 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) करने की योजना का ऐलान किया है।
वैश्विक तेल उद्योग की सर्वोच्च अंतर-सरकारी संस्था ओपेक में 12 सदस्य देश शामिल हैं, जो तेल बाजारों को स्थिर करने के लिए पेट्रोलियम नीतियों में तालमेल बिठाते हैं। दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत प्रमाणित कच्चे तेल के भंडार इन्हीं देशों के पास हैं।
ओपेक प्लस ओपेक का ही एक विस्तारित रूप है। इसमें 22 तेल निर्यातक देश शामिल हैं। ये देश विश्व बाजार में कितना कच्चा तेल बेचना है, यह तय करने के लिए नियमित रूप से बैठक करते हैं। इसमें ओपेक के 12 देशों के साथ अज़रबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, कजाकिस्तान, रूस, मैक्सिको, मलेशिया, दक्षिण सूडान, सूडान और ओमान शामिल हैं।
वर्ष 1960 में स्थापित ओपेक का मुख्य उद्देश्य अपने सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों में समन्वय और एकता स्थापित करना है, ताकि स्थिर कीमतें और उत्पादकों के लिए एक निरंतर आय सुनिश्चित की जा सके।
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