नयी दिल्ली , जून 22 -- पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार को कहा कि समुद्री क्षेत्र के सुधारों के कारण भारत 2025 में वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र बन गया है।

श्री सोनोवाल ने बताया कि संयुक्तराष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण में भारत की हिस्सेदारी सर्वाधिक 35.4 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किये गये निरंतर नीतिगत सुधारों, उद्योग जगत के प्रयासों तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एवं सुरक्षा मानकों के अनुपालन का परिणाम है। इससे जिम्मेदार एवं टिकाऊ जहाज पुनर्चक्रण के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।

उन्होंने बताया कि 2024 में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी 30.1 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 35.4 प्रतिशत हो गयी है। इसी अवधि में देश में जहाज पुनर्चक्रण की मात्रा 18.6 लाख ग्रॉस टन तथा 29.9 लाख ग्रॉस टन हो गयी है। इसके साथ ही भारत ने समुद्री भारत विजन-2030 के तहत विश्व का अग्रणी जहाज पुनर्चक्रण राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया है।

मंत्रालय के अनुसार जहाज पुनर्चक्रण क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए जहाज पुनर्चक्रण अधिनियम-2019 लागू किया गया है तथा हांगकांग कन्वेंशन के अनुरूप 115 यार्डों के आधुनिकीकरण के लिए 53.5 करोड़ रुपये की सहायता दी गयी है। इसके अलावा जहाज पुनर्चक्रण क्रेडिट नोट योजना लागू की गयी है और गुजरात के अलंग शिप रिसाइक्लिंग यार्ड के विस्तार के माध्यम से देश की क्षमता को लगभग दोगुना कर नौ मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन तक पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

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