हाजीपुर, मई 27 -- बिहार में वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह के निर्देश पर राजापाकर प्रखंड के पानापुर क्षेत्र में बड़ी मात्रा में फेंकी गई दवाओं एवं सर्जिकल सामग्री मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई गई है। प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
जिला प्रशासन के अनुसार अनुमंडल पदाधिकारी महुआ, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (स्वास्थ्य) एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि पानापुर गांव के चंवर क्षेत्र में एक बड़े गड्ढे में दवाएं एवं सर्जिकल सामग्री फेंकी गई थी। कई दवाएं पानी में डूबी मिलीं, जबकि कुछ सूखी जगह पर पाई गईं।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि दवाएं करीब तीन से चार दिन पूर्व फेंकी गई थीं, हालांकि किसी व्यक्ति की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी। जांच टीम ने पाया कि कई दवाओं की एक्सपायरी वर्ष 2027, 2028 और 2029 तक की है। साथ ही कुछ दवाएं ऐसी भी मिलीं जिनकी आपूर्ति वैशाली जिले में नहीं की गई थी।
ई-औषधि पोर्टल एवं जिला औषधि भंडार के रिकॉर्ड की जांच में यह जानकारी सामने आई कि कुछ दवाएं मेडिकल कॉलेज आपूर्ति से संबंधित हो सकती हैं। घटनास्थल से यूरो बैग, मिडाजोलम, जोलमिट्रिप्टन, पाइरिडॉक्सिन समेत कई दवाएं और सर्जिकल सामग्री बरामद की गई हैं। वहीं एक बोरा गौज का भी मिला, जिस पर मुजफ्फरपुर अंकित था।
जिला प्रशासन ने घटनास्थल से प्राप्त नमूनों की सूची तैयार कर दवाओं को सुरक्षित रखने की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही बीएमएसआईसीएल, पटना को भी सूचित करने की अनुशंसा की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उक्त दवाएं एवं सामग्री किस जिले या संस्थान के लिए आपूर्ति की गई थीं।
जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने यह भी कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं एवं सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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