नयी दिल्ली, अगस्त 10 -- वैज्ञानिकों ने उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर ऊपरी वायुमंडल में ओजोन की असामान्य रूप से उच्च सांद्रता का पता लगाया है। यह अप्रत्याशित खोज शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद कर रही है कि वायु धाराएं समताप मंडल के माध्यम से ओजोन का परिवहन किस प्रकार करती हैं।

ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) विकिरण को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है। यह सामान्यतः लगभग 25-30 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपनी अधिकतम सांद्रता तक पहुंचती है। शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि वायुमंडलीय परिसंचरण और गतिशील प्रक्रियाएं भारतीय क्षेत्र के ऊपर समताप मंडल में ओजोन के वितरण को किस प्रकार प्रभावित करती हैं।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट अनुसंधान विज्ञान संस्थान (एआरआईएस) ने वायुमंडलीय रडार, मौसम गुब्बारों, उपग्रहों और एडवांस वायुमंडलीय मॉडलों के देशव्यापी नेटवर्क से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल कर एक प्रयोग किया। यह अध्ययन एनइटीआरएडी-एएसएमए अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत किया गया था, जो देश भर के अनुसंधान संस्थानों को एक साथ लाने वाला एक राष्ट्रव्यापी वैज्ञानिक कार्यक्रम था। इस अभियान का उद्देश्य पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाली जटिल प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझना था। इस अभियान में कई संस्थानों के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें एआरआईएस के डॉ. मनीष नाजा और डॉ. समरेश भट्टाचार्य भी शामिल थे।

इस अभियान के दौरान, नैनीताल स्थित एआरआईएस में स्वदेशी रूप से विकसित 206.5 मेगाहर्ट्ज स्ट्रैटोस्फीयर-ट्रोपोस्फीयर (एसटी) रडार ने हरिणघाटा, गण्डकी और कोच्चि स्थित इसी तरह के रडारों के साथ डेटा इकट्ठा किया। शोधकर्ताओं ने वायुमंडलीय स्थितियों और ओजोन स्तरों को मापने वाले उपकरणों वाले मौसम गुब्बारे भी छोड़े। देश के विभिन्न हिस्सों से एक साथ डेटा एकत्र कर, वैज्ञानिकों ने पूरे भारत में हवा के स्वरूप और ऊर्ध्वाधर वायु गति की तुलना की, जिससे उन्हें असामान्य ओजोन घटना और इसके कारण बनने वाली वायुमंडलीय स्थितियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।

इस अभियान के दौरान, वैज्ञानिकों ने उत्तरी बंगाल की खाड़ी से लगभग 21 से 23 किलोमीटर ऊपर ओजोन की एक असामान्य रूप से मोटी परत की खोज की। इस परत में ओजोन की मात्रा पूर्वी भारत में सामान्य रूप से देखी जाने वाली मात्रा से कहीं अधिक थी और यह परत एक दिन से अधिक समय तक बनी रही। इस अप्रत्याशित खोज ने इस ऊंचाई पर इतनी अधिक ओजोन के इकट्ठा होने के पीछे के कारण के बारे में एक महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की।

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