भोपाल , अगस्त 09 -- मध्यप्रदेश में करीब 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों से जुड़े भोपाल के गुराड़ी घाट गांव में जमीन खरीदी के मामले की जांच कर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के महानिदेशक और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले की जांच की मांग की है।
पत्र में दावा किया गया है कि कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गांव में करीब 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों से संबंधित लोगों ने एक ही दिन करीब 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी थी। पत्र के अनुसार, इसमें मध्यप्रदेश कैडर के अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा और दिल्ली में पदस्थ कुछ अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक, 04 अप्रैल 2022 को करीब 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री एक दस्तावेज के माध्यम से की गई। इसमें जमीन की कीमत 5.5 करोड़ रुपये दर्ज होने, जबकि बाजार मूल्य करीब 7.78 करोड़ रुपये बताए जाने का उल्लेख है। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि जमीन के वास्तविक खरीदार चार लोग थे और अलग-अलग हिस्सों में करीब 50 अधिकारियों से जुड़े नाम सामने आए हैं।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि जमीन खरीद के करीब 16 महीने बाद 03 अगस्त 2023 को इसी क्षेत्र से लगे वेस्टर्न बायपास के निर्माण को शासन से मंजूरी मिली। इसके बाद जून 2024 में जमीन का लैंड यूज कृषि से आवासीय किए जाने का भी दावा किया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2022 में जमीन की बाजार दर करीब 84.75 रुपये प्रति वर्गफीट थी, जबकि जून 2024 में डायवर्जन के बाद यह करीब 557 रुपये प्रति वर्गफीट बताई गई। पत्र में वर्तमान बाजार दर 2500 से 3000 रुपये प्रति वर्गफीट होने का दावा करते हुए जमीन के मूल्य में भारी वृद्धि का उल्लेख किया गया है।
सिस्टम परिवर्तन अभियान ने वेस्टर्न बायपास की योजना और जमीन खरीदी के बीच संभावित संबंधों की भी जांच की मांग की है। पत्र में दावा किया गया है कि करीब 3200 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रस्तावित बायपास का नक्शा तीन बार बदला गया, लेकिन प्रत्येक बार इसका मार्ग संबंधित जमीन के आसपास से गुजरा।
पत्र में इस मामले को लेकर पूर्व में प्रकाशित समाचारों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि गुराड़ी घाट क्षेत्र में वर्ष 2013 से 2016 बैच के कई अधिकारियों द्वारा पत्नी और बच्चों के नाम पर जमीन खरीदे जाने की खबरें सामने आई थीं।
शिकायतकर्ता ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक के उस कथित बयान पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें बायपास के मार्ग में बदलाव के लिए भूमि संबंधी समस्याओं, रातापानी टाइगर रिजर्व, मंदिर और बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र का उल्लेख किया गया था। पत्र में इन दावों की भी जांच की मांग की गई है।
सिस्टम परिवर्तन अभियान ने यह भी सवाल उठाया है कि भोपाल में पहले से ईस्टर्न बायपास उपलब्ध होने के बावजूद करीब 3200 करोड़ रुपये की लागत से वेस्टर्न बायपास की आवश्यकता क्यों पड़ी। पत्र में बायपास के निर्माण से टाइगर मूवमेंट क्षेत्र और बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र पर संभावित प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वेस्टर्न बायपास के समीप जमीन खरीदी में अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की जांच जरूरी है। साथ ही अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों द्वारा जमीन खरीदी और वार्षिक संपत्ति विवरणों के सत्यापन की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है।
पत्र में इस पूरे मामले की तत्काल जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का अनुरोध किया गया है। पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
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