चंडीगढ़ , मई 23 -- पंजाब प्रदेश कांग्रेस ने वेरका मिल्कफेड में सब्सिडी वाले पशु चारा बीज वितरण को लेकर करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है और पूरे मामले की विजिलेंस तथा सीबीआई जांच की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ प्रवक्ता टीना चौधरी ने शनिवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।इस मौके पर पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष चरणजीत सिंह बराड़ भी मौजूद रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 में वेरका मिल्कफेड द्वारा किसानों को 30 प्रतिशत सब्सिडी पर हाइब्रिड मक्की बीज उपलब्ध कराने के लिए टेंडर जारी किए गए थे।उन्होंने दावा किया कि यह टेंडर मानसा स्थित नव-दुर्गा ट्रेडिंग कंपनी को दिया गया, लेकिन कंपनी ने केवल बिल जमा किए और वास्तविक रूप से बीजों की आपूर्ति नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि एक बंद पड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी की फर्जी रसीदों का इस्तेमाल कर यह दिखाया गया कि बीज वेरका के गोदामों तक पहुंचा दिए गए। इसके बाद कथित तौर पर वेरका मिल्क प्लांट होशियारपुर ने इन फर्जी बिलों को रिकॉर्ड में दर्ज कर बीजों को विभिन्न दुग्ध और पशु केंद्रों तक वितरित दिखा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड में आगे यह भी दिखाया गया कि बीज वेरका सोसायटियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचा दिए गए, जबकि वास्तव में किसानों को कोई बीज नहीं मिला।
दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि किसानों को दूध के भुगतान नकद में दिए गए और उनसे वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए गए। बाद में रिकॉर्ड में यह दर्शाया गया कि किसानों ने पशु चारा बीज खरीदे हैं और उसकी राशि उनके दूध भुगतान से काट ली गई। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे कथित घोटाले से किसानों और वेरका दोनों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वेरका की आंतरिक जांच में भी इस घोटाले का जिक्र किया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता के कारण मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष विजिलेंस जांच और सीबीआई जांच करवाई जाए ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।
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