जयपुर , अक्टूबर 26 -- राजस्थान की राजधानी जयपुर के बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में सोमवार को कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के उपयोग पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें वेबसाइट बनाने से लेकर कंटेंट तैयार करने तक एआई टूल्स के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर एआई ट्रेनर सीए कमलेश बंसल, बियानी के चेयरमैन डॉ. राजीव बियानी, डायरेक्टर डॉ. संजय बियानी, डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. ध्यान सिंह गोठवाल मौजूद थे। कार्यशाला में श्री बंसल ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को एआई के उपयोग और उसके फायदों के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि एआई की मदद से पढ़ाई, रिसर्च और रोजमर्रा के कई काम कम समय में और आसानी से किए जा सकते हैं।
इस दौरान वेबसाइट बनाना, ई-मेल का प्रबंधन, समय-सारणी तैयार करना, प्रेजेंटेशन बनाना, जानकारी जुटाना और सोशल मीडिया के लिए कंटेंट तैयार करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों को चैटजीपीटी, जेमिनी, क्लॉड, माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट, परप्लेक्सिटी एआई, नोटबुक एलएम, कैनवा, गामा, लवेबल, फ्रेमर एआई, ज़ैपियर, मेक, हेजेन और इलेवनलैब्स जैसे एआई टूल्स की जानकारी दी गई। साथ ही इनकी मदद से समय बचाने, काम को व्यवस्थित करने और बेहतर परिणाम पाने के तरीके भी समझाए गए।
इसके बाद डॉ. राजीव बियानी ने कहा कि एआई टूल्स का सही इस्तेमाल करके हम अपने समय का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं और काम को आसान एवं बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि वे एआई के बारे में जागरूक हों, इसके नए टूल्स की जानकारी लें और अपने परिवार एवं मित्रों को भी इनके उपयोग के प्रति जागरूक करें।
डॉ. संजय बियानी ने कहा कि बदलते दौर में नई तकनीकों को समझना और उनका सही इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपने शिक्षा और रोजमर्रा के कामों में एआई का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी।
कार्यशाला में बियानी गर्ल्स कॉलेज और बियानी इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड मैनेजमेंट के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान एआई से सही जानकारी प्राप्त करने, तथ्यों की जांच करने, निजी जानकारी सुरक्षित रखने और कॉपीराइट का ध्यान रखने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि एआई से तैयार सामग्री का इस्तेमाल करने से पहले उसकी जाँच करना जरूरी है।
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