लुधियाना , मई 14 -- गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी को पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा एनएसआई की ओर से धान की पराली आधारित "स्मार्ट फॉडर" विकसित करने के लिए 12 लाख रुपए का शोध प्रोजेक्ट मिला है।
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जे.पी.एस. गिल ने गुरुवार को शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य कचरे में कमी, नई आय के स्रोत और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। यह परियोजना सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और पशुधन विकास के प्रति यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। फसल अवशेषों के वैज्ञानिक उपयोग से पराली जलाने की समस्या का समाधान करने के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. जुजार सिंह सिद्धू ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत धान की पराली को वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए पौष्टिक और सुरक्षित पशु चारे में बदला जाएगा। इससे कृषि अपशिष्ट, अफ्लाटॉक्सिन प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान कम होगा, जबकि पशुपालन को अधिक कुशल और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकेगा।निदेशक रिसर्च डॉ. एस.एस. रंधावा ने कहा कि यह परियोजना पशुधन उत्पादन प्रणाली में व्यावहारिक और क्षेत्र आधारित शोध को मजबूती देगी।
एनिमल न्यूट्रिशन विभाग के प्रमुख डॉ. जे.एस. हुंडल ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फसल अवशेषों के उपयोग के लिए व्यावसायिक तकनीकें विकसित होंगी और पंजाब की कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा।
वेटरनरी एंड लाइवस्टॉक इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन फाउंडेशन के निदेशक डॉ. आर.एस. सेठी ने कहा कि ऐसे नवाचार आधारित प्रोजेक्ट तकनीक के व्यावसायीकरण, उद्यमिता विकास और किसानों तक तकनीक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
यह परियोजना एक वर्ष में पूरी की जाएगी और इससे पशुपालकों के लिए टिकाऊ चारा तकनीक विकसित होने के साथ पराली निपटान से जुड़ी पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान मिलने की उम्मीद है।
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