नयी दिल्ली , अगस्त 07 -- आलू और टमाटर की कीमतें कम होने के बावजूद घर पर बनी शाकाहारी-थाली की लागत जुलाई में चार फीसदी और मांसाहारी-थाली की नौ प्रतिशत बढ़ गयी।

क्रिसिल इंटेलिजेंस के 'रोटी-चावल दर इंडिकेटर' ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। इसके अनुसार, जुलाई में घर पर बने खाने की लागत और बढ़ गयी। पिछले साल जुलाई की तुलना में प्याज, खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ने से वेज और नॉन-वेज दोनों तरह की थालियों की लागत बढ़ी है। मांसाहारी थाली पर चिकन की कीमतें बढ़ने का अतिरिक्त असर भी पड़ा।

वहीं इस साल जून से तुलना करें तो शाकाहारी-थाली की लागत दो प्रतिशत बढ़ी, जबकि मांसाहारी-थाली की लागत स्थिर रही।

रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में ऊंचे दाम वाले रबी के स्टॉक की आवक के बाद जुलाई में प्याज की कीमत एक साल पहले के मुकाबले 20 प्रतिशत तेज हो गयी। क्रिसिल ने कहा कि महाराष्ट्र में मौसम की वजह से फसलों और स्टॉक को हुए नुकसान के कारण आपूर्ति कम हुई है, जिससे प्याज की कीमतें बढ़ीं। प्याज की पैदावार में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण आपूर्ति में रुकावट और ऊर्जा की ऊंची लागत की वजह से खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतें भी ऊंची बनी रहीं।

खाद्य तेल में 11 प्रतिशत और रसोई गैस सिलेंडर में 10 फीसदी की तेजी आयी। रिपोर्ट में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण आपूर्ति में रुकावट और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में उछाल को बताया गया।

सब्जियों की कीमतों में नरमी ने थाली की कुल लागत में बढ़ोतरी के असर को कुछ हद तक थामे रखा। आलू की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 12 प्रतिशत गिरीं, जिसमें रबी की उपज में दो-तीन फीसदी की बढ़ोतरी और खेती के बढ़े रकबे का योगदान रहा। टमाटर की कीमतें दो प्रतिशत ही गिरीं; गर्मी की फसल की आवक में देरी से आपूर्ति का चक्र बदल गया, जिससे जुलाई में बाजार में टमाटर की आवक अधिक रही।

मांसाहारी-थाली के लिए चिकन की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले अनुमानित 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। चूंकि मांसाहारी-थाली की लागत में चिकन का हिस्सा लगभग आधा होता है, इसलिए इस बढ़ोतरी का काफी असर पड़ा। क्रिसिल ने इस बढ़ोतरी का कारण चारे की ऊंची लागत और 'लो-बेस इफेक्ट' को बताया। इसका आशय है कि पवित्र श्रावण का महीना पिछले साल जुलाई में था, लेकिन इस साल अगस्त में पड़ा है।

माह-दर-माह जुलाई में प्याज और आलू की कीमतों में क्रमशः 23 प्रतिशत और चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। टमाटर की कीमतों में एक फीसदी की गिरावट और अन्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता के कारण शाकाहारी-थाली की लागत में बढ़ोतरी सीमित रही। वहीं, मांग में कमी के कारण ब्रॉयलर की कीमतों में माह-दर-माह लगभग दो प्रतिशत की गिरावट आयी, जिससे मांसाहारी-थाली की लागत में कोई बदलाव नहीं हुआ।

क्रिसिल का इंडिकेटर घर पर थाली तैयार करने की औसत लागत की गणना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में प्रचलित कीमतों के आधार पर करता है। यह मासिक बदलाव आम आदमी के खर्च पर पड़ने वाले असर को दिखाता है।

आगे चलकर, रबी की कम आपूर्ति और खरीफ प्याज की आवक में देरी की आशंका के कारण प्याज की कीमत स्थिर रहने की संभावना है। आलू के दाम थोड़े बढ़ सकते हैं क्योंकि महंगे कोल्ड-स्टोरेज स्टॉक को बाजार में लाया जा रहा है। टमाटर की कीमतें निकट भविष्य में स्थिर रहने की संभावना है। इसे दक्षिण से आने वाली नयी फसल से समर्थन मिलेगा।खरीफ की आवक में देरी और त्योहारों के मौसम की मांग के कारण सितंबर से इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

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