नयी दिल्ली , अक्टूबर 24 -- उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से पहले विदेशी आधिपत्य के विरुद्ध दक्षिण में कंपनी शासन के विरुद्ध व्यापक संघर्ष का नेतृत्व करने वाले वीर नायक पेरिया मरुदु (बड़ा भाई) और चिन्ना मरुदु (छोटा भाई) को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्री राधाकृष्णन ने उप-राष्ट्रपति भवन में दोनों नायकों के चित्र पर पुष्प अर्पित किये। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके फोटो के साथ लिखा, 'इस महान बलिदान दिवस पर, मैं मरुदु बंधुओं के शौर्य, त्याग और समर्पण का स्मरण करते हुए उन्हें नमन करता हूँ और अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। मरुदु बंधुओं ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय योगदान दिया, बल्कि आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित किया।"मरुदु बंधुओं के नाम से विख्यात दोनों भाई तमिलनाडु के शिवगंगा क्षेत्र के महान स्वतंत्रता सेनानी और कुशल सेनापति थे। उन्होंने 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से 56 वर्ष पहले ही, सन 1801 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ दक्षिण भारत में एक व्यापक विद्रोह का नेतृत्व किया था। मातृभूमि की आन-बान, गरिमा और इसकी महान विरासत की रक्षा के लिए संघर्ष करने के कारण अंग्रेजों ने उन्हें फाँसी दे दी थी।
उप राष्ट्रपति सचिवालय की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि विदेशी आधिपत्य के विरुद्ध मरुद बंधुओं की ओर से जारी 'दी जम्बूद्वीप घोषणा' एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ के रूप में विद्यमान है, जो उनकी स्वतंत्रता की आकांक्षा और जनमानस को एकजुट करने की उनकी दूरदर्शी सोच को प्रमाणित करती है।
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