चेन्नई , अक्टूबर 26 -- तमिलनाडु में ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि के खिलाफ दर्ज कई पॉक्सो मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) पहली एफआईआर में आरोपपत्र अगले तीन हफ्तों के भीतर दाखिल करेगी।
राज्य लोक अभियोजक (एसपीपी) आर. जॉन सत्यन ने सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन को यह जानकारी दी। पत्रकार आर. वराही और 'देशिया मक्कल शक्ति काची' के अधिवक्ता एम.एल. रवि ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इस कारोबारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया था।
जब न्यायमूर्ति ने एसआईटी से जांच की प्रगति के बारे में पूछा तो एसपीपी ने बताया कि जांच चल रही है। एसआईटी समय-समय पर प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर रही है और उसने अदालत में यह भी कहा कि वह जांच की प्रगति पर एक स्थिति रिपोर्ट पेश करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि पहले मामले में आरोपपत्र लगभग तैयार है और इसे तीन हफ्ते के भीतर दाखिल कर दिया जाएगा।
इस बीच श्री वराही ने मामले में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया। इसमें दावा किया गया है कि वीरमणि के खिलाफ पहले जो मामला बंद करने की रिपोर्ट दाखिल की गई थी, उससे ठीक पहले उन्होंने लगभग 147 करोड़ रुपये का बड़ा लेन-देन किया था। वराही ने यह भी आरोप लगाया कि चेन्नई सिटी पुलिस के पूर्व आयुक्त अरुण ने इस अवैध रकम में से कुछ हिस्से का इस्तेमाल लगभग 24 करोड़ रुपये की कीमत का सोना खरीदने के लिए किया था। उन्होंने कहा कि फंड ट्रांसफर की परिस्थितियां, लेन-देन कराने वाले लोग, सोना खरीदने के लिए इस्तेमाल किए गए फंड का स्रोत, भुगतान का तरीका और खरीदी गई संपत्ति का असली मालिक कौन है-इन सभी पहलुओं की गहन और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
अदालत ने एसआईटी द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट को देखा और पाया कि पुलिस ने पहले ही इस बात पर ध्यान दिया है और जांच कर रही है। न्यायमूर्ति ने स्थिति रिपोर्ट और एसपीपी की दलीलों पर विचार करने के बाद मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर तक के लिए टाल दी।
पहली याचिका में श्री वाराही ने तर्क दिया कि इस मामले में उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने आरोपियों को बचाने और कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश की। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि एसआईटी मामले की जांच स्वतंत्र और प्रभावी ढंग से नहीं करेगी, इसलिए किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत का मानना था कि तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित एसआईटी को मामले से जुड़े सभी सबूत इकट्ठा करने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।
अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि जांच में समय लगता है, खासकर ऐसे मामलों में पुलिस के पास कोई 'जादुई छड़ी' या 'क्रिस्टल बॉल' नहीं है जिससे वे एक ही बार में सारे सबूत जुटा सकें।
पॉक्सो अदालत द्वारा मामला बंद करने की रिपोर्ट 'क्लोज़र रिपोर्ट' को खारिज करने और अक्टूबर 2025 में दर्ज एफआईआर के आधार पर पुलिस को मामले की जांच करने का आदेश देने के बाद, वीरमणि को गिरफ्तार कर लिया गया। वीरमणि और अन्य लोगों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं , आईपीसी की धाराओं और तथा आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए।
अब तक वीरमणि के खिलाफ कुल आठ पॉक्सो मामले दर्ज किए जा चुके हैं। उन पर एक नाबालिग लड़की को आत्महत्या के लिए उकसाने का भी मामला दर्ज है। लड़की ने वीरमणि द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने के बाद यह कदम उठाया था। इस तरह उस पर दर्ज कुल मामलों की संख्या नौ हो गई है।
वीरमणि के खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामलों के सिलसिले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सीसीबी पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनमें करोड़ों रुपयों के लेन-देन का पता चला है। इसके अलावा, नवंबर 2024 में जब पहली शिकायत दर्ज हुई थी और इस साल की शुरुआत (2026) में जब क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की गई थी, वीरमणि और एक संदिग्ध मध्यस्थ के बीच 20 किलोग्राम से अधिक सोने का लेन-देन हुआ था। चूंकि जांच में शीर्ष पुलिस अधिकारियों और कुछ अमीर व प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता भी सामने आई, इसलिए तमिलनाडु सरकार ने पूरी तरह से महिलाओं वाली एक एसआईटी टीम का गठन किया, जो इस मामले की विस्तार से जांच कर रही है।
एक उद्योगपति को बचाने के लिए कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी रकम के लेन-देन का खुलासा होने के अलावा, इस जांच ने उन शीर्ष पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं, जिन्होंने शुरुआती शिकायत को संभाला था। बताया जाता है कि एक व्यवसायी प्रकाश कन्नईया - जो 'दक्षिण रेलवे मजदूर यूनियन' (एसआरएमयू) के नेता एन. कन्नईया के बेटे हैं - ने इन वित्तीय सौदों को तय कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। हालांकि पुलिस ने उन्हें समन जारी किया है, लेकिन गिरफ्तारी की आशंका के चलते उनकी अग्रिम जमानत याचिका को 16 अक्टूबर को पॉक्सो अदालत ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी लगभग तय हो गई थी।
चूंकि उनके ब्रिटेन में रहने की बात सामने आई है, इसलिए पुलिस अब उन्हें वापस लाने के लिए इंटरपोल की मदद लेने की योजना बना रही है, जिसके तहत एक 'ब्लू कॉर्नर नोटिस' जारी किया जाएगा।
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