पटना , अक्टूबर 28 -- िहार में ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता तय करने के उद्देश्य से ग्रामीण विकास विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है, जिसके तहत विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जीराम जी के अंतर्गत स्वीकृत की जाने वाली योजनाओं के प्राक्कलन निर्माण के दौरान प्रस्तावित स्थल का नजरी नक्शा एवं चौहद्दी सिक्योर सॉफ्टवेयर पर अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि ग्रामीण विकास योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी, व्यवस्थित और जवाबदेह तरीके से होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योजना स्थल की सही पहचान और उससे संबंधित अभिलेखों का उपलब्ध रहना न केवल योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जरूरी है, बल्कि इससे भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों और शिकायतों के निपटारे में भी सहूलियत होगी।

विभाग की तरफ से जारी निर्देश के अनुसार, प्रत्येक योजना के प्राक्कलन निर्माण के समय प्रस्तावित स्थल का नजरी नक्शा एवं उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की चौहद्दी तैयार कर अभिलेख में संधारित करने के साथ सिक्योर सॉफ्टवेयर पर अपलोड करना होगा। नजरी नक्शे में मौजा, थाना संख्या, खाता संख्या, खेसरा/प्लॉट संख्या, भूमि की प्रकृति, कार्यस्थल की लंबाई-चौड़ाई तथा सड़क, विद्यालय, मंदिर और पुल जैसे निकटतम स्थायी पहचान-चिह्नों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।इसके अतिरिक्त, नजरी नक्शा एवं चौहद्दी पर संबंधित कनीय अभियंता, पंचायत तकनीकी सहायक और पंचायत रोजगार सेवक के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। प्रस्तावित स्थल की कार्य-पूर्व जियो-टैग्ड तस्वीर भी अपलोड करनी होगी।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित दस्तावेज अपलोड किए बिना किसी भी प्राक्कलन को तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान नहीं की जाएगी। कार्य क्रियान्वयन के दौरान अथवा उसके बाद स्थल से संबंधित किसी विवाद या शिकायत की स्थिति में सिक्योर सॉफ्टवेयर पर अपलोड नजरी नक्शा एवं चौहद्दी को प्राथमिक अभिलेख माना जाएगा। अपलोड विवरण और वास्तविक स्थल में अंतर पाए जाने पर संबंधित कर्मियों एवं पदाधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।ये अभिलेख सामाजिक अंकेक्षण और शिकायत निवारण के दौरान भी सत्यापन के लिए उपयोग किए जाएंगे। साथ ही, जिन स्वीकृत योजनाओं का कार्य अभी प्रारंभ नहीं हुआ है अथवा प्रगति पर है, उनके नजरी नक्शे एवं चौहद्दी को पत्र निर्गत होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर अभिलेख में संधारित करना होगा।

ग्रामीण विकास विभाग ने सभी संबंधित जिला पदाधिकारियों-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयकों, अभियंताओं एवं कार्यक्रम पदाधिकारियों को निर्देशों का दृढ़तापूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस पहल से ग्रामीण विकास योजनाओं के स्थल चयन में स्पष्टता, कार्यों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता तथा सरकारी संसाधनों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इस मामले में मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण विकास की प्रत्येक योजना पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के साथ धरातल पर उतरे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के स्थल का सही विवरण, नजरी नक्शा एवं आवश्यक अभिलेखों का डिजिटल संधारण सुनिश्चित होने से कार्यों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से ग्रामीण जनता तक पहुँचे और सरकारी संसाधनों का उपयोग जनहित में पूरी ईमानदारी के साथ हो। इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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