बैतूल , अक्टूबर 6 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण' (वीबी-जीरामजी) योजना उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। मनरेगा के स्थान पर शुरू की गई इस नई योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जिले में इसकी सुस्त शुरुआत से हजारों मजदूर बेरोजगार बैठे हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले की कुल 554 ग्राम पंचायतों में से केवल 299 पंचायतों में ही कार्य शुरू हो पाए हैं। इन पंचायतों में फिलहाल 768 कार्य प्रगतिरत हैं, जिनसे मात्र 2621 मजदूरों को रोजगार मिल रहा है। जुलाई से अक्टूबर तक रोजगार की मांग लगातार बढ़ी है, लेकिन अधिकांश ग्रामीणों को काम नहीं मिल सका।
योजना की राह में अधूरे पड़े पुराने कार्य भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वर्ष 2023-24 से लेकर 2026-27 तक शुरू किए गए कुल 16,186 कार्यों में से केवल 413 ही पूरे हो पाए हैं, जबकि 15,773 कार्य आज भी अधूरे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नई योजना के तहत अधिक दिनों का रोजगार और तेजी से भुगतान का वादा किया गया था, लेकिन धरातल पर स्थितियां इसके विपरीत हैं। यदि प्रशासन ने जल्द ही कार्ययोजना में तेजी नहीं लाई, तो पलायन की समस्या और अधिक विकराल रूप ले सकती है।
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